
गम्हरिया: सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत छोटा गम्हरिया स्थित टाटा- कांड्रा टोल रोड पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. सड़क किनारे कई दिनों से कचरे का ढेर पड़ा हुआ है. लगातार हो रही बारिश के कारण कचरा सड़ने लगा है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग और सड़क निर्माण कंपनी दोनों इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं.


स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क किनारे जमा कचरे का लंबे समय से उठाव नहीं हुआ है. बारिश का पानी कचरे में जमा होने से सड़ांध बढ़ गई है. जिससे राहगीरों, दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दुर्गंध के कारण क्षेत्र में संक्रमण और मच्छरों के प्रकोप का खतरा भी बढ़ गया है.
ग्रामीणों और स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि टाटा- कांड्रा मार्ग जिले का महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं व्यस्त मार्ग है. इस सड़क से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं. बावजूद इसके सफाई व्यवस्था की अनदेखी की जा रही है. लोगों का आरोप है कि टोल वसूली तो नियमित की जाती है, लेकिन सड़क की साफ- सफाई और रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और सड़क निर्माण कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं. कई दिनों से कचरा हटाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
बीमारियों का बढ़ा खतरा
बरसात के मौसम में सड़ते कचरे से डेंगू, मलेरिया, दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है. स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि समय रहते कचरे का उठाव और नियमित सफाई नहीं कराई गई तो यह जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और सड़क निर्माण कंपनी से अविलंब कचरे का उठाव कराने, नियमित सफाई व्यवस्था बहाल करने तथा पूरे टोल रोड की साफ-सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र की पहचान रखने वाले इस मार्ग पर बेहतर स्वच्छता व्यवस्था होना आवश्यक है. इससे न केवल राहगीरों को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र की सकारात्मक छवि भी बनेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा- कांड्रा टोल रोड पर नियमित सफाई के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए. सड़क किनारे निर्धारित स्थानों पर डस्टबिन लगाए जाएं, प्रतिदिन कचरा उठाने की व्यवस्था हो और टोल संचालन एजेंसी तथा संबंधित विभाग की जवाबदेही तय की जाए. साथ ही स्थानीय लोगों को भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकने के प्रति जागरूक किया जाए.
रिपोर्ट: शुभम मिश्रा





