सरायकेला: जिले में सड़क सुरक्षा की बैठकें लगातार हो रही हैं. दुर्घटनाएं रोकने के निर्देश दिए जा रहे हैं और यातायात नियमों के उल्लंघन पर लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला जा रहा है. इसके बावजूद सितंबर महीने में 20 सड़क दुर्घटनाओं में 16 लोगों की मौत और 12 लोगों का घायल होना सड़क सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है.


उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एक बार फिर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने, ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने, सड़क निर्माण एवं मरम्मत में तेजी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए.
जिला परिवहन पदाधिकारी शंकराचार्य सामद द्वारा प्रस्तुत सितंबर के प्रतिवेदन के अनुसार इसी अवधि में यातायात नियमों के उल्लंघन पर 16 लाख 65 हजार 550 रुपये जुर्माना वसूला गया. यहीं सवाल उठता है कि सड़क सुरक्षा अभियान की सफलता की कसौटी आखिर जुर्माने की रकम है या हादसों में कमी ?

दोपहिया का चालान आसान, भारी वाहनों और बेतरतीब पार्किंग पर कितनी सख्ती ?
आम लोगों के बीच यातायात पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दोपहिया वाहनों के हेलमेट और कागजात की जांच जरूरी है, लेकिन सड़क सुरक्षा का दायरा इससे कहीं बड़ा है.


टाटा- कांड्रा मुख्य सड़क के सर्विस रोड पर “नो पार्किंग” का बोर्ड लगा होने के बाद खड़े वहन
तेज रफ्तार भारी वाहन, गलत दिशा में परिचालन, सड़क किनारे अनधिकृत पार्किंग, खतरनाक ड्राइविंग और मुख्य मार्गों पर यातायात बाधित करने वाली गतिविधियों पर कितनी कार्रवाई हो रही है, इसका परिणाम भी सड़कों पर दिखाई देना चाहिए. चालान सड़क सुरक्षा का साधन है, लक्ष्य नहीं. असली लक्ष्य लोगों की जान बचाना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है.
18 दुर्घटना संभावित स्थल, कब दुरुस्त होंगे इंतजाम ?
बैठक में चांडिल गोलचक्कर, चिलगू पुल, जामडीह ऊपरिगामी पुल सहित जिले के 18 दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. प्रकाश व्यवस्था, हाई मास्ट लाइट, संकेतक और वाहन चालकों को सतर्क करने वाली सड़क पट्टियां लगाने पर जोर दिया गया. वहीं तीतिरबिला सड़क की मरम्मत जल्द पूरी करने और सरायकेला- कांड्रा-आदित्यपुर मार्ग के निर्माण में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया.
मुख्य सड़कों के किनारे अतिक्रमण कर संचालित दुकानों और बेतरतीब खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं. मगर सवाल फिर वही है कि बैठक के बाद इन निर्देशों की निगरानी कौन करेगा और अनुपालन की समयसीमा क्या होगी ?
पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने यातायात निरीक्षक और थाना प्रभारियों को सघन वाहन जांच, पुलिस गश्त, जागरूकता और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. तेज गति पर नियंत्रण और स्पीड लिमिट संकेतक लगाने पर भी जोर दिया गया.
अब इन निर्देशों की असली परीक्षा बैठक कक्ष में नहीं, जिले की सड़कों पर होगी. हर महीने निर्देश और लाखों की चालान वसूली तभी सार्थक होगी, जब ब्लैक स्पॉट सुरक्षित हों, बेतरतीब पार्किंग और तेज रफ्तार पर अंकुश लगे और सबसे महत्वपूर्ण, सड़क हादसों तथा मौतों के आंकड़े नीचे आएं.
प्रमोद सिंह (संपादक)

