लोहरदगा: आदिवासियों के मसीहा, दूरदर्शी नेता, शिक्षाविद् और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभियंता, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोहरदगा के पूर्व सांसद स्वर्गीय बाबा कार्तिक उरांव की जयंती गुरुवार को हिरही गांव में हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई गई. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोहरदगा के सांसद सह छत्तीसगढ़ राज्य के प्रभारी सुखदेव भगत शामिल हुए. आयोजन समिति और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक तरीके से उनका भव्य स्वागत किया.


प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत सांसद सुखदेव भगत द्वारा बाबा कार्तिक उरांव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई. इस दौरान उन्होंने बाबा कार्तिक उरांव के योगदान को याद करते हुए उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया.

जनसमूह को संबोधित करते हुए सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे. एक साधारण और गरीब आदिवासी परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने देशसेवा के उद्देश्य से राजनीति में कदम रखा और सांसद के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं.
आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया जीवन
सांसद ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी समाज के उत्थान, अधिकारों और विकास के लिए समर्पित कर दिया था. देशभर के आदिवासियों को एकजुट करने और उनकी आवाज को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उन्होंने अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का गठन किया था. यह संगठन आज भी आदिवासी समाज के हितों और अधिकारों के लिए कार्य कर रहा है.
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के सर्वांगीण विकास में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है. आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है. बाबा कार्तिक उरांव के विचारों को अपनाकर और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है. उनके आदर्शों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
पारंपरिक जतरा में शामिल हुए सांसद
जयंती समारोह के अवसर पर भव्य पारंपरिक जतरा का भी आयोजन किया गया. इसमें दर्जनों खोड़हा नृत्य दलों ने हिस्सा लिया. पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां दीं.
इस दौरान सांसद सुखदेव भगत भी खोड़हा नृत्य दलों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक नृत्य कर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया. सांसद का यह आत्मीय अंदाज ग्रामीणों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा. उनके साथ नृत्य में शामिल होने से ग्रामीणों में खासा उत्साह और खुशी देखने को मिली. कार्यक्रम में संरक्षक सुनील भगत, अध्यक्ष वाजी उरांव, राजेश उरांव, महावीर उरांव, प्रेम रंजन उरांव, नीरू शांति भगत, आलोक साहू, वीरेंद्र यादव, कुलदीप शाखा और किशोर उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं अन्य लोग उपस्थित थे.

