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सरायकेला: नगर पंचायत इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है. कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद उनके अचानक गायब हो जाने से पूरे कार्यालय की व्यवस्था ठप हो गई है. पिछले चार से पांच दिनों से कोई भी सरकारी कामकाज नहीं हो पा रहा है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
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नगर पंचायत कार्यालय की स्थिति “बिना कप्तान के जहाज” जैसी हो गई है. समीर बोदरा न तो कार्यालय आ रहे हैं और न ही उनसे किसी प्रकार का संपर्क हो पा रहा है. उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है. उनके अनुपस्थित रहने का सीधा असर सभी प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है.
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कार्यालय में रोजाना दर्जनों लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए पहुंच रहे हैं. कोई जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, कोई होल्डिंग टैक्स से संबंधित काम, तो कोई निर्माण और योजनाओं की फाइल लेकर पहुंचता है, लेकिन बिना काम हुए निराश होकर लौटना पड़ रहा है.
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि कार्यपालक पदाधिकारी के हस्ताक्षर के बिना कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ सकती, जिससे पूरा सिस्टम जाम हो गया है.
नगर पंचायत के कर्मचारी भी असहाय नजर आ रहे हैं. एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वे रोज कार्यालय आ रहे हैं, लेकिन काम करने की स्थिति नहीं है. जनता का गुस्सा भी उन्हें ही झेलना पड़ रहा है, जबकि उनके हाथ में कोई अधिकार नहीं है. कार्यालय परिसर में रोजाना लोगों की भीड़ देखी जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द किसी अन्य अधिकारी को प्रभार दिया जाए ताकि कामकाज सुचारू रूप से शुरू हो सके.
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. इतने महत्वपूर्ण पद के अधिकारी के अनुपस्थित रहने के बावजूद अब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. सरायकेला नगर पंचायत इस समय पूरी तरह प्रशासनिक ठहराव का सामना कर रहा है. अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब तक इस स्थिति को संभालने के लिए ठोस कदम उठाता है.