सरायकेला: नगर पंचायत में इन दिनों एक अजीब तस्वीर देखने को मिल रही है. सोशल मीडिया पर विकास कार्यों की तस्वीरें, बैठकों की झलकियां और उपलब्धियों के दावे लगातार सामने आ रहे हैं. लेकिन दूसरी ओर शहर की सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. लोग पानी के लिए परेशान हैं. नालियां बजबजा रही हैं. मच्छरों का आतंक बढ़ता जा रहा है. बिजली की आंखमिचौनी से जनजीवन प्रभावित है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विकास अब सिर्फ फेसबुक तक सीमित होकर रह गया है ?



नगर पंचायत के कई वार्डों में पिछले एक सप्ताह से पेयजल संकट गहरा गया है. सुबह- शाम लोग नलों में पानी आने का इंतजार करते हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर नल सूखे पड़े हैं. महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. जिस व्यवस्था से लोगों को राहत मिलनी चाहिए थी, वही व्यवस्था सवालों के घेरे में है.
स्वच्छता की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. कई वार्डों की नालियां महीनों से साफ नहीं हुई हैं. बरसात में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है. दुर्गंध के बीच मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है. हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत के पास फॉगिंग मशीन होने के बावजूद नियमित फॉगिंग नहीं हो रही. लोगों का आरोप है कि मशीन का इस्तेमाल धरातल से ज्यादा तस्वीरों में दिखाई देता है.
उधर बिजली की अनियमित आपूर्ति ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है. बार-बार बिजली कटने से घरेलू कामकाज के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं. उमस भरे मौसम में लोगों का जीवन कठिन हो गया है.
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी तालमेल का अभाव विकास कार्यों पर असर डाल रहा है. राजनीतिक खींचतान का खामियाजा आखिरकार आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि उन्हें सोशल मीडिया पर प्रचार नहीं, बल्कि घर तक पानी, साफ नालियां, नियमित बिजली और मच्छरों से राहत चाहिए.
अब सवाल सिर्फ मूलभूत सुविधाओं का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है. नगर पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को यह बताना होगा कि समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे. विकास की तस्वीरें यदि धरातल पर नहीं दिखेंगी, तो प्रचार के दावे जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खोते जाएंगे.
आखिर सवाल वही है. क्या सरायकेला नगर पंचायत में विकास फेसबुक से निकलकर कभी सड़कों, मोहल्लों और लोगों के घरों तक पहुंचेगा. या जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए यूं ही इंतजार करती रहेगी ?
प्रमोद सिंह (संपादक)





