सरायकेला: खेत केवल फसल उत्पादन का जरिया नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार हैं. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से सरायकेला- खरसावां जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है. 22 अक्टूबर से शुरू हुआ यह अभियान 30 नवंबर तक चलेगा. इसके तहत जिले के प्रत्येक प्रखंड के 30 गांवों तक पहुंचकर किसानों को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है.


भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की पहल के तहत कृषि विभाग की आत्मा इकाई अभियान को गांवों तक पहुंचा रही है. किसानों को मिट्टी की नियमित जांच, जरूरत के अनुरूप खाद एवं उर्वरकों के इस्तेमाल, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती की जानकारी दी जा रही है.
बिना जरूरत खाद डालने से बचें किसान
आत्मा के उप परियोजना निदेशक विजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का प्रमुख उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और संतुलित खाद प्रबंधन को बढ़ावा देना है. कई बार किसान मिट्टी की वास्तविक जरूरत जाने बिना खाद का इस्तेमाल करते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
उन्होंने किसानों से समय-समय पर मिट्टी की जांच कराने और रिपोर्ट के आधार पर ही खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल करने की अपील की. साथ ही रासायनिक खाद के अनावश्यक एवं असंतुलित प्रयोग को कम कर गोबर खाद, कम्पोस्ट और अन्य उपयुक्त जैविक खादों को खेती में शामिल करने पर जोर दिया.
गांव-गांव पहुंचेंगे ATM, BTM और किसान मित्र
अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए कृषि तकनीकी प्रबंधक (ATM), प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (BTM) और किसान मित्र गांवों में जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं. प्राकृतिक खेती के साथ फसल चक्र, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन और स्थानीय जैविक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की जानकारी भी दी जा रही है.
विजय कुमार सिंह ने कहा, “खेत की मिट्टी स्वस्थ रहेगी, तभी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होगा. किसानों को मिट्टी की नियमित जांच करानी चाहिए और जरूरत के अनुसार ही खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. खेतों की सेहत बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती योग्य जमीन सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है.” उन्होंने किसानों से ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़ने और कृषि विभाग से मिलने वाली तकनीकी जानकारी को खेती में अपनाने की अपील की.
प्रमोद सिंह (संपादक)

