जामताड़ा: जिले के कर्माटांड़ में एक ई-बाइक का पिछला चक्का चलते-चलते टूटकर वाहन से अलग हो जाने का मामला सामने आया है. हेठ कर्माटांड़ निवासी अशोक कुमार मंडल, पिता सतजीत मंडल ने वाहन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कंपनी और डीलर के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई की मांग की है. पीड़ित के मुताबिक घटना के दौरान चालक बाल-बाल बच गया.


अशोक कुमार मंडल के अनुसार उन्होंने JVK Gamma ई-बाइक कर्माटांड़ स्थित बाबा ई-व्हीकल शोरूम से खरीदी थी. उनका आरोप है कि समतल सड़क पर वाहन चलाते समय अचानक पिछले पहिये में खराबी आई और चक्का वाहन से अलग हो गया. उस समय सड़क पर कोई बड़ा गड्ढा नहीं था और न ही वाहन को जोरदार झटका लगा था.
पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद वाहन पूरी तरह बंद हो गया और उसे धक्का देकर घर तक ले जाना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि ई-बाइक में इससे पहले भी छोटी-बड़ी खराबियां आती रही हैं. शिकायत करने के बावजूद कंपनी और शोरूम से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. हालांकि इन आरोपों पर कंपनी और संबंधित डीलर का पक्ष सामने आना बाकी है.
70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का दावा, रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल
मामले में वाहन की वास्तविक अधिकतम गति और रजिस्ट्रेशन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. अशोक कुमार मंडल का दावा है कि उनकी JVK Gamma ई-बाइक करीब 70 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की गति से चलती है, लेकिन उन्हें वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और नंबर प्लेट उपलब्ध नहीं कराया गया.
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में केवल ऐसे बैटरी चालित दोपहिया वाहनों को कुछ प्रावधानों से छूट मिलती है, जिनकी अधिकतम गति 25 किमी प्रति घंटे से कम और मोटर की क्षमता 0.25 किलोवाट से कम हो. इसलिए यदि संबंधित वाहन वास्तव में इससे अधिक क्षमता अथवा गति वाली श्रेणी में आता है तो उसकी नियामकीय स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है. वाहन की वास्तविक श्रेणी का निर्धारण उसके तकनीकी दस्तावेज और टाइप अप्रूवल के आधार पर ही किया जा सकता है.
परिवहन विभाग से मॉडल और दस्तावेजों की जांच की मांग
पीड़ित ने परिवहन विभाग और प्रशासन से संबंधित ई-बाइक की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. उन्होंने वाहन की मोटर क्षमता, अधिकतम स्वीकृत गति, टाइप अप्रूवल, रजिस्ट्रेशन स्थिति और बिक्री के समय उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच की मांग की है.
सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यदि जांच में वाहन हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक दोपहिया श्रेणी का पाया जाता है तो उसे बिना रजिस्ट्रेशन नंबर और नंबर प्लेट के उपभोक्ता को किस आधार पर दिया गया. इसका जवाब संबंधित वाहन के दस्तावेजों और परिवहन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
चलते वाहन का चक्का अलग होना गंभीर सुरक्षा का सवाल
अशोक कुमार मंडल ने वाहन की गुणवत्ता में खामी का आरोप लगाते हुए कहा कि चलते वाहन का पिछला चक्का टूटकर अलग होना गंभीर सड़क सुरक्षा का मामला है. घटना के समय पीछे से कोई तेज रफ्तार वाहन आ रहा होता तो बड़ा हादसा हो सकता था.
उन्होंने कंपनी और डीलर की जिम्मेदारी तय करने के साथ वाहन से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है. साथ ही कर्माटांड़ सहित जिले में ई-वाहनों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों में वाहनों के प्रमाणन, बिक्री दस्तावेज और नियामकीय मानकों की जांच कराने की मांग की है.
फिलहाल वाहन में तकनीकी अथवा निर्माण संबंधी खामी होने की स्वतंत्र जांच नहीं हुई है. इसलिए इसे पीड़ित का आरोप माना जाना चाहिए. तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चक्का अलग होने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

