आदित्यपुर: क्या सरायकेला- खरसावां और जमशेदपुर के अपराध जगत में एक बड़े अध्याय का अंत होने वाला है ? क्या वर्षों से एक- दूसरे के विरोधी माने जाने वाले सागर लोहार और विक्की नंदी अब हाथ मिलाकर गैंगवार खत्म करने की तैयारी में हैं ? अपराध जगत से जुड़े सूत्रों से मिल रही जानकारी कुछ ऐसा ही संकेत दे रही है. हालांकि दोनों की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक या आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल इसे पुष्ट तथ्य के बजाय अपराध जगत में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए.


सूत्रों का दावा है कि दोनों पक्ष अब लगातार खून- खराबे और आपसी टकराव से बाहर निकलकर सामान्य जिंदगी की ओर लौटने पर विचार कर रहे हैं. यदि यह वास्तव में होता है तो आदित्यपुर और आसपास लंबे समय से चली आ रही गैंगवार की कहानी में यह बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.
दोस्ती से दुश्मनी तक, 2021 का हमला बना बड़ा टर्निंग प्वाइंट
सागर और विक्की के बीच टकराव केवल अपराध जगत की चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा है. नवंबर 2021 में आदित्यपुर के बेल्डीह छठ घाट के पास विक्की नंदी पर बम और गोली से हमला हुआ था. पुलिस ने उस समय मामले के खुलासे में सागर लोहार को हमले की साजिश का मुख्य आरोपी बताया था. पुलिस के मुताबिक दोनों के बीच स्क्रैप कारोबार और पैसे को लेकर विवाद बढ़ा था. इस मामले में छह आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी. करीब आठ महीने बाद जुलाई 2022 में इसी मामले में सागर लोहार ने सरायकेला कोर्ट में सरेंडर किया था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी और गैंगवार की चर्चाएं लगातार सामने आती रहीं.
भोलू हत्याकांड ने फिर भड़काई थी गैंगवार की आशंका
मई 2024 में कदमा में भोलू कुम्हार की हत्या के बाद एक बार फिर सागर और विक्की के बीच पुरानी अदावत चर्चा में आई. पुलिस जांच से संबंधित रिपोर्टों में विक्की नंदी पर भोलू की हत्या की सुपारी देने का आरोप सामने आया था. बाद में इस मामले में विक्की ने कोर्ट में सरेंडर किया था. रिपोर्टों में यह भी दर्ज है कि इससे पहले विक्की की हत्या की कथित साजिश के मामले में सागर लोहार और भोलू समेत अन्य लोगों को पुलिस ने हथियार के साथ गिरफ्तार किया था. इसके कुछ ही समय बाद जून 2024 में आदित्यपुर के कल्पनापुरी पहाड़ी मैदान के पास विवेक सिंह की हत्या हुई. विवेक को विक्की नंदी का करीबी बताया गया और उस समय के रिपोर्टों में शक की सुई सागर लोहार एवं कार्तिक मुंडा गिरोह की तरफ जाने की बात सामने आई थी. हालांकि ऐसी रिपोर्टों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. यानी दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी की कहानी महज जुबानी नहीं रही. अलग- अलग समय पर बमबाजी, हत्या, हत्या की साजिश और गैंगवार से जुड़े मामलों में इनके या इनके कथित सहयोगियों के नाम सामने आते रहे हैं.
सागर के खिलाफ दर्ज रहे हैं गंभीर मामले
सागर लोहार का आपराधिक रिकॉर्ड भी लंबा बताया गया है. 2024 की एक रिपोर्ट में पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से उसके खिलाफ सरायकेला- खरसावां जिले के अलग- अलग थानों में हत्या, आर्म्स एक्ट, लूट, डकैती और रंगदारी समेत करीब 30 मामले दर्ज होने की बात कही गई थी.

कुणाल नंदी की पत्नी पुलिस मुख्यालय में
इसलिए अपराध छोड़ने की इच्छा और कानूनी जिम्मेदारियों से मुक्त होना दो अलग- अलग बातें हैं. यदि कोई आरोपी वास्तव में मुख्यधारा में लौटना चाहता है, तब भी उसके खिलाफ लंबित मामलों का फैसला कानून और अदालत की प्रक्रिया से ही होगा.
क्या अब बदल रही है अपराध जगत की तस्वीर ?
इसी पृष्ठभूमि में सागर और विक्की के बीच संभावित समझौते की चर्चा महत्वपूर्ण हो जाती है. सूत्रों की मानें तो सागर भी अब आगे खून- खराबा नहीं चाहता. दूसरी तरफ विक्की खेमे को लेकर भी अपराध से दूरी बनाने की चर्चाएं हैं. मिली जानकारी के अनुसार विक्की नंदी के बड़े भाई कुणाल नंदी उर्फ़ बिट्टू नंदी की पत्नी द्वारा एसपी को ज्ञापन देकर पति को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने का आग्रह किया गया है. पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने बताया कि यदि पुलिस नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दे सकती है तो अपराधियों को क्यों नहीं. यदि दोनों गिरोह आपस में सुलह करते हैं और अपराध से दूर होते हैं तो पुलिस उन्हें सशर्त सहयोग करेगी. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि पुलिस- प्रशासन भी कानून के दायरे में अपराध छोड़ने वालों को सकारात्मक अवसर देने के पक्ष में है तो यह गैंगवार रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है. मगर मुख्यधारा में वापसी का अर्थ पुराने अपराधों पर पर्दा डालना नहीं हो सकता. कानून अपना काम करेगा और भविष्य में अपराध से दूरी बनाए रखना संबंधित लोगों की सबसे बड़ी परीक्षा होगी.
सुलह हुई तो कई जिंदगियां बच सकती हैं
सागर और विक्की की कथित सुलह को केवल दो व्यक्तियों की दोस्ती के रूप में देखना भी अधूरा होगा. गैंगवार में अक्सर निशाना केवल गिरोह का प्रमुख नहीं होता. उसके सहयोगी, परिवार और कई बार घटनास्थल पर मौजूद निर्दोष लोग भी इसकी कीमत चुकाते हैं. 2021 में विक्की पर हुए हमले में उसके अलावा अन्य लोग भी घायल हुए थे. इसलिए यदि दोनों पक्ष वास्तव में हथियार और प्रतिशोध की राजनीति छोड़ते हैं तो इसका सबसे बड़ा लाभ इलाके की कानून- व्यवस्था और उन युवाओं को हो सकता है जो इन गिरोहों के प्रभाव में अपराध की दुनिया में प्रवेश करते हैं. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल वही है- क्या सचमुच सागर लोहार और विक्की नंदी हाथ मिलाने वाले हैं, या अपराध जगत में किसी नई रणनीति के तहत यह चर्चा फैलाई जा रही है !
इसका जवाब आने वाला समय देगा. लेकिन यदि खबर सही साबित हुई और दोनों ने वास्तव में अपराध से तौबा कर कानून के दायरे में सामान्य जीवन चुना, तो कभी खूनी अदावत के लिए चर्चित दो नामों की कहानी का अंत शायद गोलियों से नहीं, समझौते और मुख्यधारा में वापसी से लिखा जाएगा. इसका एक उदाहरण आदित्यपुर नगर निगम वार्ड 12 का नव निर्वाचित पार्षद मोतीलाल बिशोई है जिसने अपराध की दुनिया को छोड़ जनसेवा का रास्ता चुना और क्षेत्र की जनता ने उसे सरआंखों पर बिठाया और पहली बार में ही उसने चुनावी जीत दर्ज की.
संतोष कुमार

