सरायकेला: जिले की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके कालीपद सोरेन उर्फ केपी सोरेन ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. लंबे समय से पार्टी में उपेक्षा का आरोप झेल रहे केपी सोरेन के इस फैसले को जिले में कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.


पार्टी छोड़ने की घोषणा के दौरान केपी सोरेन भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें कांग्रेस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, लेकिन वर्तमान कांग्रेस पहले जैसी नहीं रही. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है तथा संगठन के कई लोग मूल विचारधारा से भटक गए हैं. उनके अनुसार शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली के कारण राज्य में कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है.
केपी सोरेन का राजनीतिक और शैक्षणिक जीवन काफी समृद्ध रहा है. उन्होंने भूगोल और संथाली विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है. वे पहले राम मनोहर लोहिया कॉलेज में भूगोल के प्राध्यापक रहे और बाद में रांची कॉलेज में संथाली भाषा के प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दीं.
झारखंड आंदोलन के दौरान भी उनकी सक्रिय और बौद्धिक भूमिका रही. वे झारखंड आंदोलन के प्रमुख चिंतक एवं शिक्षाविद् राम दयाल मुंडा की टीम में शामिल रहे तथा निर्मल मिंज और बीपी केसरी जैसे आंदोलनकारी नेताओं के सहयोगी के रूप में कार्य किया.
राजनीतिक जीवन में उन्होंने अविभाजित बिहार में जनता पार्टी के टिकट पर खिजरी विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़ा. झारखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2009 में कांग्रेस के टिकट पर सरायकेला विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे. क्षेत्र में उनकी पहचान एक शिक्षित, साफ- सुथरी और वैचारिक राजनीति करने वाले नेता के रूप में रही है.
उनका परिवार भी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से प्रतिष्ठित माना जाता है. उनकी पत्नी ओलिव ग्रेस कुल्लू जेल अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनगर प्रमुख चुनी गई थीं, हालांकि बाद में उनका असामयिक निधन हो गया. उनका एक पुत्र चिकित्सक हैं और वर्तमान में रिम्स में सेवाएं दे रहे हैं.
केपी सोरेन के इस्तीफे के बाद जिले की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि वे भविष्य में किस राजनीतिक दल का रुख करेंगे या कोई नई राजनीतिक रणनीति अपनाएंगे. हालांकि इस संबंध में फिलहाल उन्होंने कोई संकेत नहीं दिया है और आगे की रणनीति पर मौन बनाए हुए हैं.



