
सरायकेला: जिला शिक्षा विभाग में लंबे समय से चर्चा का विषय बने सांत्वना जेना प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है. इंडिया न्यूज़ वायरल में प्रमुखता से लगातार प्रकाशित हो रहे खबर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा ने पूरे मामले की जांच के आदेश देते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक के नेतृत्व में जांच समिति का गठन किया है. समिति को 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच शुरू होते ही विभाग में हलचल तेज हो गई है और वर्षों पुराने दस्तावेजों व अभिलेखों की तलाश शुरू कर दी गई है.


सूत्रों के अनुसार जांच समिति सबसे पहले सांत्वना जेना की नियुक्ति और सेवा से संबंधित मूल अभिलेखों की पड़ताल कर रही है. बताया जा रहा है कि संबंधित सेवा फाइल फिलहाल विभाग में उपलब्ध नहीं है. यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा अभिलेखों के संधारण तथा वर्षों तक हुए वेतन भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और समिति सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि यदि मूल सेवा अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं तो पिछले लगभग 16 वर्षों से वेतन भुगतान किस आधार पर किया गया. समिति विभागीय नियमों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय स्वीकृतियों की भी जांच करेगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी कार्य नियमानुसार किए गए थे या नहीं.
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू सांत्वना जेना को प्रभारी प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) का अतिरिक्त दायित्व सौंपे जाने से भी जुड़ा है. विभागीय सूत्रों के अनुसार समिति इस बात की भी जांच करेगी कि उन्हें यह जिम्मेदारी किस आदेश और किन परिस्थितियों में दी गई. यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है.
जिला शिक्षा पदाधिकारी की भूमिका पर भी चर्चा
मामला सार्वजनिक होने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा की भूमिका को लेकर भी विभाग में चर्चाएं तेज हैं. हालांकि, जांच समिति का गठन स्वयं उनके द्वारा किया गया है. ऐसे में विभाग का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
15 दिनों में साफ होगी तस्वीर
जिला शिक्षा अधीक्षक के नेतृत्व में गठित समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. रिपोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा अभिलेख, वेतन भुगतान, प्रभारी बीपीओ का अतिरिक्त प्रभार तथा विभागीय नियमों के अनुपालन सहित सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी.
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. फिलहाल पूरे जिले की नजर इस बहुचर्चित प्रकरण की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है.
प्रमोद सिंह (संपादक)





