नई दिल्ली: सहारा समूह की सहकारी समितियों में फंसे निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. केंद्र सरकार के Ministry of Cooperation ने CRCS-Sahara Refund Portal को फिर से ‘री-सबमिशन’ के लिए सक्रिय कर दिया है. अब वे निवेशक, जिनके आवेदन पहले दस्तावेजी कमी या तकनीकी कारणों से खारिज हो गए थे, दोबारा आवेदन कर सकेंगे.

नई गाइडलाइंस के अनुसार अब 10 लाख रुपये तक के दावों के लिए पुनः आवेदन की सुविधा दी गई है. जिन आवेदनों में पहले ‘डिफिशिएंसी’ बताई गई थी, उन्हें सुधारकर पोर्टल पर दोबारा अपलोड किया जा सकता है. सरकार ने आश्वासन दिया है कि सही पाए जाने पर 45 कार्यदिवस के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
बिहार के संदर्भ में यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक राज्य के करीब 18.75 लाख निवेशकों का 10,154 करोड़ रुपये से अधिक सहारा में फंसा हुआ है. अब तक लगभग 1,892.89 करोड़ रुपये की वापसी हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में निवेशक अब भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं.
निवेशकों की संख्या और प्रक्रियागत जटिलताओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने रिफंड की समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दी है. इससे उन लोगों को भी मौका मिला है, जो अब तक आवेदन नहीं कर पाए थे या जिनके आवेदन अधूरे रह गए थे.
सहकारिता मंत्रालय ने निवेशकों को आगाह किया है कि वे किसी भी बिचौलिये या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं. पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और निःशुल्क है. निवेशकों को केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की सलाह दी गई है, ताकि राशि सीधे उनके बैंक खाते में सुरक्षित पहुंच सके.
इधर झारखंड में सहारा कार्यालयों के बंद होने के बाद निवेशकों की परेशानी बढ़ी है. राज्य सरकार से इस मुद्दे पर गंभीर पहल की मांग उठ रही है, खासकर तब जब चुनाव के दौरान भुगतान दिलाने का वादा किया गया था.

