जामताड़ा: रेलवे साइडिंग में कार्यरत दैनिक मजदूरों ने श्रम अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर उपायुक्त से न्याय की गुहार लगाई है. मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से उन्हें न्यूनतम मजदूरी, समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है.


जय अंबे रोड लाइंस प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस शर्मा ट्रांसपोर्ट एवं एम/एस एमजीएम रेलवे साइडिंग जामताड़ा के अधीन कार्यरत मजदूरों ने उपायुक्त को दिए आवेदन में कहा है कि उन्हें निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता. साथ ही मजदूरी का भुगतान भी नियमित और समय पर नहीं होता, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनी रहती है.
मजदूरों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. रेलवे साइडिंग में कोयला और अन्य सामग्रियों की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान धूल और गंदगी के बीच काम करना उनकी मजबूरी है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे लगातार बने रहते हैं.
श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है. उन्हें बीमा, भविष्य निधि, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है. इसके अलावा साप्ताहिक अवकाश जैसी बुनियादी श्रम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं.
मजदूरों ने उपायुक्त से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वैरिएबल डीए (VDA), कोल माइंस प्रोविडेंट फंड अधिनियम 1948 (CMPF), कोल माइंस पेंशन योजना 1997 (CMPS) तथा अन्य लागू श्रम कानूनों के तहत उन्हें सभी वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित कराई जाएं.
उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन पर हस्ताक्षर करने वालों में धर्मेंद्र सिंह, माना ठाकुर, संजय भैया, शुभंकर दास, रीता सिंह सहित दर्जनों मजदूर शामिल हैं. श्रमिकों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करेगा और उन्हें उनके अधिकार दिलाने की दिशा में पहल करेगा.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल



