सरायकेला: जमशेदपुर के युवा कारोबारी निखार सबलोक की हत्या की कहानी जितनी खुल रही है, उतनी ही उलझती जा रही है. एक के बाद एक गिरफ्तारी, हथियार और मोबाइल की बरामदगी के बीच अब इस हत्याकांड की जांच केवल शूटरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही. ताजा गिरफ्तारी अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह की है. उसकी निशानदेही पर कथित रूप से वारदात में इस्तेमाल बजाज एवेंजर बाइक, दो मोबाइल और एक लोडेड देशी पिस्टल बरामद हुई है. लेकिन सिंटू की गिरफ्तारी के बाद असली सवाल उससे भी बड़ा है.


क्या निखार की हत्या केवल एक कारोबारी या जमीन विवाद का परिणाम थी, या इसके पीछे जमशेदपुर के अपराध जगत में बदलते शक्ति- संतुलन की कोई बड़ी कहानी छिपी है ? और सबसे बड़ा सवाल- अशोक सिंह राघव के कॉल डिटेल में सामने आने की चर्चा वाले वे कथित ‘34 नाम’ आखिर किसके हैं और उनका राघव से रिश्ता क्या है ? यहीं से निखार हत्याकांड की कहानी क्राइम इन्वेस्टिगेशन के एक नए अध्याय में प्रवेश करती दिखाई दे रही है.
सिंटू के दो मोबाइल खोलेंगे अगला राज ?
पुलिस ने मंगलवार को आशियाना ब्रह्मानंद, तामुलिया निवासी अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू को गिरफ्तार किया. उसकी निशानदेही पर बाइक और हथियार के साथ दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं. यही मोबाइल अब जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं जैसे-
वारदात से पहले सिंटू किन लोगों के संपर्क में था ?
घटना के बाद किससे बातचीत हुई ?
बाइक और हथियार की व्यवस्था किसने की ?
पैसे कहां से आए और निर्देश किस स्तर से मिल रहे थे ?
इन सवालों के जवाब डिजिटल जांच से मिल सकते हैं.
इससे पहले गिरफ्तार रितेश सिंह, सुनील रजक और अंकित सिंह को पुलिस तीन दिनों की रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है. अशोक सिंह राघव सहित अन्य आरोपी पहले ही पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं, जबकि कथित शूटर सागर सिंह उर्फ शिबू अभी फरार है.
राघव ने लिया अखिलेश का नाम, लेकिन क्या सबूत भी उसी दिशा में हैं ?
इस केस का सबसे सनसनीखेज मोड़ अशोक सिंह राघव के कथित बयान से आया. राघव ने पुलिस को दिए अपने बयान में दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह के इशारे पर निखार की हत्या कराए जाने की बात कही है. मगर यहीं पुलिस के सामने सबसे कठिन प्रश्न खड़ा होता है. क्या राघव का बयान सच है या इस बयान के पीछे भी कोई कहानी है ?
अब तक सार्वजनिक रूप से सामने आई पुलिस की जांच में अखिलेश सिंह की भूमिका को स्वतंत्र साक्ष्यों से निर्णायक रूप से स्थापित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है. इसलिए पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है. आरोपी का बयान जांच का एक सिरा हो सकता है, अंतिम निष्कर्ष नहीं.
यदि अखिलेश ने जेल से निर्देश दिया तो उसका कम्युनिकेशन चैनल क्या था ?
संदेश किसके जरिए राघव तक पहुंचा ?
क्या कोई डिजिटल या वित्तीय ट्रेल मौजूद है ?
इन्हीं सवालों की पुष्टि इस थ्योरी का भविष्य तय करेगी.
विक्रम शर्मा की मौत के बाद आखिर किसके हाथ में आया नेटवर्क ?
यहीं कहानी का दूसरा सिरा दिवंगत विक्रम शर्मा तक पहुंचता है. अपराध जगत से जुड़े सूत्रों और शहर में चल रही चर्चाओं के मुताबिक विक्रम शर्मा पर आरोप लगते रहे कि उसने अपनी सार्वजनिक छवि बदलने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई थी. कुछ सोशल मीडिया संचालकों और मीडिया से जुड़े लोगों से उसके संबंधों को लेकर भी चर्चाएं रही हैं. हालांकि इसे किसी संबंधित मीडिया कर्मी की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता. मगर पुलिस सूत्रों का दावा है कि जांच का अगला बिंदु इसी एंगल पर केंद्रित होगा. विक्रम शर्मा की हत्या के बाद उसका प्रभाव और नेटवर्क आखिर किसके नियंत्रण में गया ?
इसी संदर्भ में करीब ₹1200 करोड़ के कथित साम्राज्य की चर्चा भी अपराध जगत में होती रही है. इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं है, लेकिन यदि संपत्ति और आर्थिक हितों को लेकर वास्तव में कोई बड़ा विवाद मौजूद था तो पुलिस के लिए हत्या के पीछे “किसे फायदा” वाला सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है.
क्या राघव तैयार कर रहा था अपना अलग नेटवर्क !
यहीं से एक और थ्योरी जन्म लेती है. अपराध जगत में चर्चा है कि विक्रम शर्मा के बाद राघव अपना स्वतंत्र नेटवर्क मजबूत कर रहा था. यदि ऐसा था तो दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह की भविष्य में संभावित रिहाई उस समीकरण को कैसे प्रभावित करती ?
दिसंबर में अखिलेश सिंह की संभावित रिहाई को लेकर चल रही चर्चा की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है. लेकिन अपराध जगत में इसी संभावना को लेकर यह सवाल जरूर उठाया जा रहा है कि यदि अखिलेश बाहर आता, तो पुराने नेटवर्क और उसके नियंत्रण को लेकर समीकरण क्या होते ?
क्या निखार हत्याकांड उसी संभावित शक्ति- संघर्ष की कोई कड़ी है ? या राघव ने अखिलेश का नाम लेकर जांच की दिशा उससे दूर करने की कोशिश की ? फिलहाल दोनों सवाल हैं, निष्कर्ष नहीं.
34 नाम’ जांच की सबसे संवेदनशील फाइल
अब जांच का सबसे संवेदनशील हिस्सा राघव के कॉल डिटेल में कथित तौर पर सामने आए 34 संपर्कों को माना जा रहा है. सूत्रों के स्तर पर इनमें मीडिया अथवा सोशल मीडिया से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क होने की चर्चा है. लेकिन पुलिस ने सार्वजनिक रूप से इन 34 लोगों की सूची जारी नहीं की है. वैसे केवल कॉल रिकॉर्ड में किसी का नंबर होना अपराध में उसकी संलिप्तता साबित करता है. फिर भी जांच का सवाल महत्वपूर्ण है.
हत्या से ठीक पहले और बाद में राघव ने किससे बात की ?
किन संपर्कों की फ्रीक्वेंसी अचानक बढ़ी ?
किसके साथ आर्थिक लेनदेन हुआ ?
क्या किसी ने वाहन, ठिकाना, हथियार, शूटर या सूचना उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई ?
यदि इन सवालों के जवाब कॉल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल और गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल से आपस में जुड़ते हैं, तभी 34 नामों की वास्तविक अहमियत सामने आएगी.
मीडिया कनेक्शन की जांच हुई तो पुलिस के सामने भी उठेंगे सवाल
यदि जांच वास्तव में मीडिया अथवा सोशल मीडिया नेटवर्क तक पहुंचती है तो सवाल केवल संबंधित व्यक्तियों से नहीं होंगे. सवाल पुलिस और खुफिया तंत्र से भी होंगे. यदि किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क ने मीडिया की आड़ लेकर अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया था, तो क्या स्थानीय खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी थी ? पुलिस ने उस समय क्या कार्रवाई की ? क्या संबंधित लोगों की गतिविधियां कभी निगरानी के दायरे में आई थीं ? सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग क्या कर रहा था ?
असली मास्टरमाइंड कौन ?
निखार सबलोक हत्याकांड में अब पुलिस के सामने कई चेहरे हैं. अशोक सिंह राघव गिरफ्तार है. रितेश सिंह, सुनील रजक और अंकित सिंह रिमांड पर हैं. अभिमन्यु उर्फ सिंटू की गिरफ्तारी के बाद बाइक, मोबाइल और लोडेड पिस्टल बरामद हुई है. सागर सिंह उर्फ शिबू की तलाश जारी है. मगर हत्या का सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी है-
निखार को मारने का अंतिम फैसला किसने लिया ?
फंडिंग किसने की ?
क्या अखिलेश सिंह का नाम लेने वाला राघव सच बोल रहा है या किसी बड़ी कहानी को छिपा रहा है ?
विक्रम शर्मा की मौत के बाद नेटवर्क पर नियंत्रण की लड़ाई का इस हत्या से कोई संबंध है या नहीं ?
और सबसे महत्वपूर्ण- राघव के कॉल डिटेल के कथित 34 नामों में क्या केवल सामान्य संपर्क हैं, या उनमें कोई ऐसा चेहरा भी है जो निखार हत्याकांड की अब तक अनसुलझी कड़ी खोल देगा ?अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू की गिरफ्तारी ने पुलिस को एक और दरवाजा खोलकर दिया है. अब निगाह उसके दो मोबाइल, राघव के कॉल रिकॉर्ड, कथित वित्तीय लेनदेन और फरार शूटर शिबू पर है. इन कड़ियों के मिलने के बाद ही तय होगा कि निखार हत्याकांड की कहानी वहीं है जो अब तक दिखाई दे रही है, या पर्दे के पीछे कहानी कुछ और है.

