
सरायकेला: नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर देने का दावा करने वाले कोल्हान विश्वविद्यालय पर अब उन्हीं छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप लग रहे हैं. विश्वविद्यालय ने पहले चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में पात्र छात्रों को ‘शोध सहित ऑनर्स’ का विकल्प दिया, लेकिन अब बिना किसी सार्वजनिक अधिसूचना के यह विकल्प हटा दिया गया है. इससे हजारों विद्यार्थियों में असमंजस और नाराजगी का माहौल है.


वर्ष 2020 में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की व्यवस्था की गई थी. इस व्यवस्था के अनुसार तीसरे वर्ष के बाद स्नातक उपाधि तथा चौथे वर्ष में ऑनर्स अथवा शोध सहित ऑनर्स प्रदान करने का प्रावधान किया गया. जिन विद्यार्थियों का निर्धारित मानक के अनुसार 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए होता, उन्हें शोध सहित ऑनर्स करने का अवसर मिलना था, जिससे आगे सीधे पीएचडी में प्रवेश का मार्ग भी प्रशस्त होता.

कोल्हान विश्वविद्यालय ने सत्र 2022-26 में इसी व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों का नामांकन लिया. हालांकि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रक्रिया लगातार विलंब का शिकार रही. जिन छात्रों को वर्ष 2025 में स्नातक उपाधि मिल जानी चाहिए थी, वे जून 2026 तक भी अंतिम परिणाम और उपाधि का इंतजार करते रहे.
छठे सेमेस्टर का परिणाम जारी होने के बाद विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के लिए एक निकास प्रपत्र जारी किया, जिसमें तीन विकल्प दिए गए थे- स्नातक उपाधि लेकर निकास, ऑनर्स उपाधि तथा शोध सहित ऑनर्स उपाधि. लेकिन 6 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अचानक बदलाव कर ‘शोध सहित ऑनर्स’ का विकल्प हटा दिया गया. विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से बताया गया कि विश्वविद्यालय अब शोध सहित ऑनर्स नहीं कराएगा. हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है.
विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को निर्देश दिया है कि वे 15 जुलाई से पहले केवल स्नातक उपाधि लेकर निकास या ऑनर्स उपाधि में से किसी एक विकल्प का चयन कर अपने-अपने महाविद्यालय में प्रपत्र जमा करें. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय ने स्वयं उन्हें शोध सहित ऑनर्स का विकल्प दिया था और उसी आधार पर कई विद्यार्थियों ने बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन किया. अब अंतिम समय में यह विकल्प हटाकर उन विद्यार्थियों को भी सामान्य श्रेणी में ला दिया गया है, जो इस उपाधि के लिए पात्र थे.
छात्रों का कहना है कि एक ओर कई विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप शोध आधारित अध्ययन को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं कोल्हान विश्वविद्यालय में इस विकल्प को समाप्त कर योग्य विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया गया है. लगातार विलंबित शैक्षणिक सत्र से पहले ही परेशान छात्र अब विश्वविद्यालय से मांग कर रहे हैं कि ‘शोध सहित ऑनर्स’ का विकल्प पुनः बहाल किया जाए तथा इस संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी अधिसूचना जारी कर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए.
प्रमोद सिंह (संपादक)





