
जामताड़ा: मानसून के दौरान नदी से बालू खनन पर प्रतिबंध के बावजूद जामताड़ा जिले में बराकर नदी के करमाटार घाट से बड़े पैमाने पर अवैध बालू उठाव होने के आरोप सामने आए हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि जामताड़ा थाना क्षेत्र की चालना पंचायत अंतर्गत राशीपारा गांव के समीप स्थित इस घाट से प्रतिदिन करीब 300 ट्रैक्टर बालू की ढुलाई की जा रही है.


उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों तथा Sustainable Sand Mining Management Guidelines-2016 और Enforcement & Monitoring Guidelines for Sand Mining-2020 के तहत मानसून अवधि में नदी से बालू खनन पर रोक का प्रावधान है. इसी क्रम में जामताड़ा के उपायुक्त आलोक कुमार ने 10 जून से 15 अक्टूबर तक जिले की नदियों से बालू उठाव पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था. साथ ही संबंधित अधिकारियों को अवैध खनन रोकने के लिए सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे.

हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि करमाटार घाट पर हर रोज तड़के करीब तीन बजे से बालू खनन शुरू हो जाता है. उनका कहना है कि यहां खनन कार्य में लगे मजदूरों के लिए अस्थायी शेड भी बनाए गए हैं, जिससे यह गतिविधि लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित होने की आशंका जताई जा रही है.

ग्रामीणों के अनुसार, घाट से ट्रैक्टरों में बालू लादकर करमाटार, राशीपारा, करमा और धोबना गांव होते हुए फुलजोरी मोड़ तक पहुंचाया जाता है. वहां बालू डंप करने के बाद बड़े मालवाहक वाहनों और हाईवा के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से गांवों की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, धूल और बालू फैलने से लोगों को परेशानी हो रही है तथा दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है.

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिला मुख्यालय और जामताड़ा थाना से अपेक्षाकृत कम दूरी पर यदि इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, तो संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं दे रही. हालांकि, इन आरोपों पर जिला प्रशासन और खनन विभाग की ओर से इस समाचार के लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और मानसून में बालू खनन पर लगाए गए प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है या नहीं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल






