
जामताड़ा: रेलनगरी चित्तरंजन में रविवार की शाम कला, साहित्य और संगीत के नाम रही. श्रीलता इंस्टीट्यूट के ऑडिटोरियम में आयोजित रवीन्द्र- नजरुल सांस्कृतिक संध्या में साहित्य प्रेमियों, कलाकारों और विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया. कार्यक्रम की शुरुआत कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर और विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई.


इसके बाद स्थानीय कलाकारों ने रवीन्द्र संगीत, नजरुल गीति, समूह नृत्य और कविता पाठ की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिसने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया. कलाकारों की शानदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ उनका उत्साहवर्धन किया.
इस अवसर पर गोतम श्रीमनी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर और काजी नजरुल इस्लाम की रचनाएं आज भी मानवता, प्रेम, समानता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना का संदेश देती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी कलाकारों, अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया तथा साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल






