
जामताड़ा. सदर अस्पताल जामताड़ा के स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग में भर्ती महिला मरीजों और प्रसूताओं को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल के महिला एवं प्रसूति वार्ड में लगातार पुरुषों की आवाजाही देखी जा रही है. कई बार पुरुष अटेंडेंट वार्ड के खाली बेडों पर आराम करते भी नजर आते हैं, जिससे महिला मरीजों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.


प्रसूति के बाद महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से अत्यंत संवेदनशील अवस्था में होती हैं. ऐसे समय में वार्ड के भीतर पुरुषों की मौजूदगी उनकी निजता और गरिमा को प्रभावित कर रही है. कई माताओं को अपने नवजात शिशुओं को समय पर स्तनपान कराने में भी कठिनाई हो रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है.
विशेष रूप से सिजेरियन प्रसव से गुजरी महिलाओं की स्थिति अधिक चिंताजनक बताई जा रही है. ऑपरेशन के बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी, दर्द और असहजता के बीच पास के बेडों पर पुरुषों की मौजूदगी उन्हें मानसिक पीड़ा और शर्मिंदगी का अहसास करा रही है.
अस्पताल प्रबंधन ने पूर्व में व्यवस्था सुधार के लिए योजना बनाई थी. इसके तहत महिला वार्ड में मरीज के साथ केवल एक महिला अटेंडेंट को रहने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया था. साथ ही अन्य वार्डों में भी एक अटेंडेंट के लिए पास जारी करने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी. हालांकि यह व्यवस्था अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है.
अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. जानकारी के अनुसार अस्पताल में 18 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, लेकिन वार्डों में आने-जाने वाले लोगों की प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है. मरीजों के परिजन भी विवाद और झंझट से बचने के लिए इस समस्या पर खुलकर आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं.
इस संबंध में प्रभारी सिविल सर्जन सह अस्पताल उपाधीक्षक दिनेश कुमार ने कहा कि बार-बार मना करने के बावजूद पुरुष अटेंडेंट महिला एवं प्रसूति वार्ड में बने रहते हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा गार्डों को सख्त निर्देश दिया जाएगा ताकि किसी भी पुरुष को महिला एवं प्रसूति वार्ड में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करने दिया जाए.
महिला मरीजों की निजता, गरिमा और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ा यह मुद्दा अब गंभीर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहा है. सवाल यह है कि मरीजों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाई जाने वाली व्यवस्थाएं आखिर धरातल पर प्रभावी रूप से क्यों लागू नहीं हो पा रही हैं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल


