
जामताड़ा: पोपुलर नर्सिंग होम के अल्ट्रासाउंड कक्ष को सील किए जाने का मामला अब केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रह गया है. यह पूरा घटनाक्रम जामताड़ा सिविल सर्जन कार्यालय की कार्यप्रणाली, कथित भ्रष्टाचार और फाइलों को महीनों तक दबाकर रखने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.


जानकारी के अनुसार, पोपुलर नर्सिंग होम प्रबंधन ने मार्च 2026 में अल्ट्रासाउंड मशीन के लाइसेंस नवीकरण के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज और डिमांड ड्राफ्ट सिविल सर्जन कार्यालय में जमा कर दिए थे. आरोप है कि कार्यालय में तैनात एक कर्मी ने फाइल को जानबूझकर आगे नहीं बढ़ाया, जिसके कारण तीन महीने तक नवीकरण की प्रक्रिया लंबित रही.
नियमों के अनुसार, पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत आवेदन प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर एडवाइजरी कमेटी और सक्षम प्राधिकारी को लाइसेंस नवीकरण अथवा अस्वीकृति पर फैसला लेना अनिवार्य है. यदि निर्धारित अवधि में कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तो संबंधित केंद्र को स्वतः “डीम्ड रजिस्टर्ड” माना जाता है. इसके बावजूद एसडीओ द्वारा अल्ट्रासाउंड कक्ष को सील किए जाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है.
नर्सिंग होम प्रबंधन का दावा है कि समयसीमा पूरी होने के बाद 8 जून को दोबारा सभी दस्तावेज और डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए. इसके बाद 11 जून को उपायुक्त आलोक कुमार की अध्यक्षता में पीसीपीएनडीटी एक्ट की समीक्षा बैठक भी हुई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से नवीकरण से संबंधित फाइल बैठक में प्रस्तुत ही नहीं की गई.
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब सूत्रों के हवाले से यह आरोप सामने आया कि सिविल सर्जन कार्यालय में बिना “चढ़ावा” दिए फाइलों का आगे बढ़ना मुश्किल माना जाता है. एक कर्मचारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि अल्ट्रासाउंड मशीन के नवीकरण के बदले कथित रूप से मोटी रकम की मांग की गई थी और इसी कारण फाइल को जानबूझकर लंबित रखा गया.
हालांकि, इन आरोपों पर सिविल सर्जन डॉ. शिवप्रसाद मिश्रा ने कहा कि पीसीपीएनडीटी से जुड़ी फाइलों का प्रभार हाल ही में एक कर्मचारी से दूसरे कर्मचारी को दिया गया है. यदि किसी कर्मचारी द्वारा रुपये मांगने की शिकायत सही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं उपायुक्त आलोक कुमार ने भी पूरे मामले को गंभीर बताते हुए सिविल सर्जन को जांच कर दोषी कर्मियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देने की बात कही है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जामताड़ा स्वास्थ्य विभाग में बिना कथित लेन-देन के फाइलों का निस्तारण संभव नहीं है ? यदि आवेदन समय पर जमा था और विभाग ने तय समय सीमा में कोई निर्णय नहीं लिया, तो फिर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है ? पोपुलर नर्सिंग होम प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल






