जामताड़ा : जिले के फुलजोरी ग्राम में प्रस्तावित पत्थर खनन एवं क्रशर संचालन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है. ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन सौंपकर खनन कार्य पर रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि फुलजोरी मौजा में पुनः पत्थर खनन और क्रशर संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे पर्यावरण, कृषि और प्राकृतिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.


ग्रामीणों ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि फुलजोरी क्षेत्र में पूर्व में भी पत्थर खदान संचालित की गई थी. खदान की लीज अवधि समाप्त होने के बाद उसका संचालन बंद कर दिया गया था, लेकिन अब दोबारा खनन शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की हरी-भरी पहाड़ियां यहां की पहचान और प्राकृतिक धरोहर हैं. यदि इन पहाड़ियों का अस्तित्व खत्म होता है तो न केवल पर्यावरणीय क्षति होगी, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक अस्मिता भी प्रभावित होगी.
मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त आलोक कुमार के निर्देश पर माइनिंग इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार ने शनिवार को फुलजोरी स्थित खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान स्थल की स्थिति और ग्रामीणों की आपत्तियों का जायजा लिया गया. बताया गया है कि जांच प्रतिवेदन जल्द ही उपायुक्त को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
माइनिंग इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार ने बताया कि उक्त खदान को कालेश्वरी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर आवंटित किया गया है. उन्होंने कहा कि पूर्व उपायुक्त रवि आनंद के कार्यकाल में निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर कंपनी को खदान की लीज प्रदान की गई थी.
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है. उनका कहना है कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीणों की आजीविका से समझौता नहीं किया जाना चाहिए.
उपायुक्त को आवेदन सौंपने वालों में बसुदेव टुडू, हेमलाल हेंब्रम, महावीर टुडू, कीर्तन हेंब्रम, डेली टुडू, कैलाश मारांडी, मनोज परगनैत, देवीलाल सोरेन, श्याम मुर्मू और रतन हेंब्रम सहित कई ग्रामीण शामिल हैं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल



