
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के तुरामडीह स्थित नांदूप गांव में सोमवार को उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे. इस दौरान पारंपरिक ग्रामसभा के लोगों ने उनका जोरदार विरोध किया और उन्हें तथा उनके समर्थकों को यूसील प्रबंधन का दलाल बताते हुए पुतला दहन किया. ग्रामसभा के सदस्यों ने क्षेत्र को पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र बताते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों के अधिकारों और हितों की अनदेखी की जा रही है.


दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना है. उन्होंने बताया कि यूसील प्रबंधन के साथ बातचीत में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों और पूर्व में हुए समझौतों के आधार पर स्थानीय लोगों को रोजगार, मुआवजा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है. उन्होंने ग्रामसभा द्वारा लगाए गए दलाली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश बताया.
दरअसल, नांदूप गांव के विस्थापितों का कहना है कि तुरामडीह माइंस की स्थापना उनकी जमीन पर हुई है और सबसे अधिक प्रभावित इसी गांव के लोग हुए हैं. ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच पहले रोजगार और पुनर्वास को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन आज तक उसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया. एक जून को भी विस्थापित समिति ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यूसील प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा था, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
विस्थापितों की प्रमुख मांगों में यूसील के ठेका कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता, पुराने ठेका मजदूरों को नहीं हटाने, बर्खास्त कर्मचारियों या उनके आश्रितों की पुनर्नियुक्ति, लंबित बहाली, पुनर्वास, धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण, मार्केट कॉम्प्लेक्स में दुकान आवंटन, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बिजली, बच्चों के लिए निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, आदिवासी भाषा- संस्कृति का संरक्षण, लाको बोदरा की प्रतिमा की स्थापना, ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त घरों का मुआवजा और प्रदूषण पर रोक जैसी मांगें शामिल हैं. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि वे विस्थापितों के हित में समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं. फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं.
एक ओर ग्रामसभा पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल उठा रही है, जबकि दूसरी ओर अर्जुन मुंडा स्वयं को विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाला बता रहे हैं. ऐसे में वास्तविक स्थिति और आरोप- प्रत्यारोप की सच्चाई प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
Edited By Sarita






