
जमशेदपुर: पटमदा प्रखंड के कांकु गांव में प्रस्तावित स्टोन क्रशर एवं पत्थर खनन परियोजना को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. एक ओर जहां कुछ ग्रामीण और सामाजिक संगठन परियोजना का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में ग्रामीणों और रैयत परिवारों ने इसके समर्थन में मोर्चा खोल दिया है.


शनिवार को कांकु गांव और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने उपायुक्त कार्यालय और जिला खनन कार्यालय का करीब दो घंटे तक घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए खनन एवं स्टोन क्रशर परियोजना को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की.
ग्रामीणों का कहना है कि पटमदा क्षेत्र रोजगार और औद्योगिक विकास के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है. स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है. ऐसे में यदि क्षेत्र में खनन और स्टोन क्रशर उद्योग स्थापित होता है तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि परियोजना के लिए 33 रैयत परिवारों ने स्वेच्छा से अपनी जमीन उपलब्ध कराई है. उनका कहना है कि उद्योग लगने से केवल रोजगार ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि सड़क, बिजली, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार होगा, जिससे पूरे क्षेत्र का विकास संभव हो सकेगा.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी हितों और व्यक्तिगत कारणों से परियोजना का विरोध कर रहे हैं तथा विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए परियोजना को जल्द मंजूरी दी जाए.
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, उद्योग क्षेत्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई. ग्रामीणों ने कहा कि यदि परियोजना शुरू होती है तो इसका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिलना चाहिए.
धरना-प्रदर्शन के कारण उपायुक्त कार्यालय और जिला खनन कार्यालय परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा. प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन प्राप्त कर उनकी मांगों पर नियमानुसार विचार करने का आश्वासन दिया.
गौरतलब है कि कांकु में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से पक्ष और विपक्ष दोनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं. जहां एक पक्ष पर्यावरण और स्थानीय हितों का हवाला देकर परियोजना का विरोध कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे क्षेत्र के विकास और रोजगार से जोड़कर समर्थन कर रहा है. ऐसे में अब प्रशासन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
Edited By Sarita Mahato


