
जमशेदपुर: परसुडीह थाना अंतर्गत श्यामा प्रसाद स्कूल में सामुदायिक पुलिसिंग के तहत शनिवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र- छात्राओं को सुरक्षा. कानून और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाना था. ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में सही निर्णय ले सकें और स्वयं के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकें.


कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को विभिन्न आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी और बताया कि दुर्घटना. अपराध. छेड़खानी. साइबर अपराध या अन्य आपात स्थिति में किस प्रकार संबंधित हेल्पलाइन का उपयोग कर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है.
इसके साथ ही बच्चों को साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में विस्तार से बताया गया. अधिकारियों ने सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने. मजबूत पासवर्ड बनाने. ओटीपी और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने. फर्जी लिंक. ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड और साइबर ठगी से बचने के उपाय समझाए.
नशा मुक्ति जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक. मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई. उन्हें नशे से दूर रहने तथा आसपास किसी भी प्रकार की नशाखोरी की सूचना मिलने पर अभिभावकों या पुलिस को जानकारी देने के लिए प्रेरित किया.
पुलिस अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों पर भी विशेष चर्चा की. विद्यार्थियों को सड़क पार करने के सही तरीके. ट्रैफिक सिग्नलों का पालन. दोपहिया वाहन पर हेलमेट पहनने. चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने तथा यातायात नियमों का पालन करने के महत्व के बारे में बताया गया.
कार्यक्रम में बाल अधिकार. बाल संरक्षण. महिला एवं बालिका सुरक्षा तथा मानव तस्करी जैसे गंभीर विषयों पर भी बच्चों को जागरूक किया गया. अधिकारियों ने कहा कि किसी भी प्रकार के शोषण. उत्पीड़न. छेड़खानी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने अभिभावकों. शिक्षकों या पुलिस को दें और किसी भी लालच या झांसे में न आएं.
विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं.
परसुडीह थाना पुलिस ने कहा कि भविष्य में भी सामुदायिक पुलिसिंग के तहत विभिन्न विद्यालयों और सामाजिक संस्थानों में इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे. ताकि समाज में सुरक्षा, जागरूकता और कानून के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया जा सके.
रिपोर्ट: अफ़रोज़ मल्लिक





