jamshedpur-chuna-shah-baba-55th-urs-mubarak-celebration जमशेदपुर: हजरत बादशाह अब्दुल रहीम शाह बाबा उर्फ चुना शाह बाबा के 55 वें उर्स मुबारक में जुटे देशभर के जायरीन; सजदे में झुके हजारों सर
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जमशेदपुर/ Afroz Mallik टाटा साहब की नगरी जमशेदपुर में स्थित है चुना शाह बाबा का मजार. यह मजार टाटा स्टील के बाउंड्री वॉल से सटा हुआ है. इस मजार पर हर साल देश के कोने कोने से जायरीनों का जुटान होता है. मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से मुराद मांगने आता है बाबा उसकी मुराद पूरी करते हैं. हर साल बाबा के उर्स में हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है.
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यहां न कोई हिन्दू होता है न कोई मुसलमान सिख या इसाई. बाबा की कृपा सभी पर समान रूप से बरसती है. उनका नाम हजरत बादशाह अब्दुल रहीम शाह उर्फ चुना शाह बाबा है. बुधवार को बाबा का 55वां उर्स मुबारक धूमधाम के साथ मनाया गया. इस मौके पर पूरे भारत से मस्तान और फकीर बाबा के दरबार में पहुंचे.
आपको बता दें कि यह उर्स मुबारक 28 अप्रैल से 1 मई तक मनाया गया. 1 मई को दोपहर 2 बजे लंगरे आम का आयोजन किया गया. वही रात 9 बजे से कव्वाली का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें मशहूर कव्वाल असलम निजामी और मोइन निजामी अपनी आवाज का जादू बिखेरा. इस उर्स मुबारक के मौके पर मुंबई चेंबूर से घास वाले दरगाह के गद्दी नसीम जमाल बाबा, उड़ीसा के बादशाह बाबा समेत हिंदुस्तान के कोने- कोने से पहुंचे मस्तान और फकीर ने एक से बढ़कर एक करतब दिखाए जिसे देखकर लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई.
उर्स मुबारक में पहुंचे मुंबई के जमाल बाबा ने कहा कि चुना शाह बाबा ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी धर्म के लोगों को गले लगाया. यहां धर्म नहीं चलता यहां सिर्फ प्रेम चलता है. जो बाबा से प्रेम करते हैं बाबा उससे प्रेम करते हैं. चुना शाह बाबा अल्लाह के वली है. उन्होंने बताया चुना शाह बाबा मजार शरीफ में उर्स के मौके पर हिंदुस्तान के कोने- कोने से बाबा के चाहने वाले पहुंचकर उर्स मुबारक में शामिल होते हैं. उन्होंने बताया यहां ठहरने की व्यवस्था नहीं है जिससे दूर- दराज से आए मस्तान, फकीर समेत जायरीनों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. अगर दरगाह कमेटी या जनप्रतिनिधि एक मुसाफिरखाना बनवा देते तो दरगाह शरीफ में आने- जाने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता.
वही उर्स मुबारक में पहुंचे कोलकाता बंगाल के जयरीन मोहम्मद ताजू ने कहा कि चुना शाह बाबा का दरबार बहुत ही आला दरबार है. दूर- दूर से लोग यहां पर आते हैं और बाबा से दुआ करते हैं. बाबा सभी की दुआओं को कबूल करते हैं. उन्होंने कहा कि निस्बत हमने इसी दर से पाई है. हमने क्या सारे शहर वालों ने इस दर पे अपनी सर झुकाई है .