सरायकेला: गम्हरिया थाना परिसर में कथित दुष्कर्म के मामले में गुरुवार को घटनाक्रम ने बड़ा मोड़ ले लिया. अब तक खुद को पीड़िता का पति बताकर उसके साथ हुए कथित दुष्कर्म के मामले में न्याय की मांग कर रहा शंकर दास ही पुलिस की गिरफ्त में आ गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.


मामले की दिशा तब बदली जब खबर प्रकाशित होने के बाद ओडिशा के बड़बिल से कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ पीड़िता की मां गम्हरिया थाना पहुंचीं और अपनी बेटी के नाबालिग होने का दावा किया. पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की, जिसमें पीड़िता के नाबालिग होने की बात सामने आई. इसके बाद जांच का दायरा तत्काल बढ़ा दिया गया.
मां का आरोप- छह महीने पहले घर से निकली थी बेटी
पीड़िता की मां के अनुसार उनकी बेटी करीब छह महीने पहले घर से निकल गई थी. उन्होंने शंकर दास पर बेटी को अपने कब्जे में रखने, जबरन विवाह करने और यौन शोषण के लिए मजबूर करने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
इन आरोपों के बाद पुलिस ने शंकर दास की भूमिका की जांच करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ POCSO Act के साथ संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9 के तहत कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है.
दोबारा मेडिकल, कोर्ट में 164 का बयान
नए तथ्यों के सामने आने के बाद पीड़िता का दोबारा मेडिकल परीक्षण कराया गया. इसके बाद उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया है. सूत्रों का दावा है कि पीड़िता ने अपने बयान में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं. पुलिस अब इन तथ्यों का स्वतंत्र साक्ष्यों से मिलान कर रही है.
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान पुलिस को कथित यौन शोषण से संबंधित कुछ विजुअल साक्ष्य भी मिलने की बात कही जा रही है, जिन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का दावा है. इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है.
नशा दिए जाने का आरोप, घटना की रात की स्मृति को लेकर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे पहले कई मौकों पर नशीला पदार्थ दिया जाता था. घटना की रात की पूरी परिस्थितियां उसे स्पष्ट रूप से याद नहीं होने की बात भी सामने आ रही है. उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया है कि घटना की रात उसने आरोपी वायरलेस ऑपरेटर के साथ शराब का सेवन किया था और इसके बाद उसके साथ कथित यौन अपराध हुआ. पीड़िता ने पूर्व में दिए गए कुछ बयानों को कथित पति के दबाव में देने की बात भी कही है. इन दावों की सत्यता और घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां अब SIT की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होंगी.
कई अन्य नामों की चर्चा, पुलिस के सामने जांच की नई चुनौती
सूत्रों का दावा है कि पीड़िता ने कुछ अन्य लोगों पर भी गंभीर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. पुलिस के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इन आरोपों को मेडिकल, डिजिटल, तकनीकी और अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों से सत्यापित करने की होगी. सिर्फ बयान में किसी का नाम सामने आने से अपराध सिद्ध नहीं होता. इसलिए पुलिस की जांच में यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण होगा कि कथित घटनाएं कब हुईं, उस समय पीड़िता की उम्र क्या थी और आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं.
पुलिसकर्मियों पर भी बढ़ सकती है कानूनी कार्रवाई
पीड़िता के नाबालिग होने की बात सामने आने के बाद थाना परिसर की घटना का कानूनी स्वरूप भी बदल गया है. सूत्रों के अनुसार मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ POCSO Act के प्रावधान जोड़े जाने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है. अंतिम धाराएं जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होंगी.
गौरतलब है कि गम्हरिया थाना प्रकरण में आरोपी वायरलेस ऑपरेटर सहित संबंधित पुलिसकर्मियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, जबकि थाना प्रभारी समेत 15 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है.
अब सिर्फ ‘थाने की एक रात’ नहीं रही जांच
पीड़िता के नाबालिग होने और उसके पूर्व कथित शोषण से जुड़े आरोप सामने आने के बाद जांच अब केवल गम्हरिया थाना परिसर में हुई कथित घटना तक सीमित नहीं रह गई है. पुलिस के सामने पीड़िता के घर से निकलने से लेकर शंकर दास के संपर्क में आने, कथित विवाह, उसके साथ हुए कथित शोषण और आखिरकार उस रात थाना पहुंचने तक की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है.
एसपी मनोज स्वर्गियारी ने कहा है कि मामले का अनुसंधान जारी है. पूरे प्रकरण में जिसकी भी संलिप्तता साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
गम्हरिया कांड की कहानी अब एक पुलिसकर्मी पर लगे दुष्कर्म के आरोप से कहीं आगे निकल चुकी है. जांच की अगली कड़ियां यह तय करेंगी कि इस नाबालिग के साथ कथित शोषण की शुरुआत कहां से हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और उसके थाना पहुंचने से पहले की पूरी कहानी क्या थी.
प्रमोद सिंह (संपादक)

