चांडिल: चौका थाना क्षेत्र के खुचीडीह गांव में बुधवार देर शाम आठ जंगली हाथियों के झुंड के पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई. हाथियों को गांव से भगाने के प्रयास के दौरान संजय महतो हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद जहां वन विभाग की तैयारियों को लेकर सवाल उठे, वहीं सूचना मिलते ही ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने अधिकारियों से संपर्क कर घायल के बेहतर इलाज की व्यवस्था कराई. संजय महतो का फिलहाल जमशेदपुर के टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) में इलाज चल रहा है.


घटना की जानकारी ग्रामीणों और झामुमो नेता पशुपति महतो ने विधायक सविता महतो को दी. विधायक ने वन विभाग के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने और घायल को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा. TMH में विधायक के आप्त सचिव काबलू महतो ने संजय महतो को भर्ती कराने और इलाज की प्रक्रिया में सहयोग किया. वनरक्षी मुन्ना सोरेन भी अस्पताल में मौजूद रहे.
एम्बुलेंस नहीं मिलने पर मोटरसाइकिल से निकले ग्रामीण
घटना के बाद घायल संजय महतो को अस्पताल पहुंचाने के लिए तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है. ग्रामीणों के अनुसार गंभीर रूप से घायल संजय को पहले मोटरसाइकिल से लेकर निकलना पड़ा. इसके बाद उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था की गई. इस घटनाक्रम ने हाथी प्रभावित ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.
सांसद प्रतिनिधि का सवाल- महीनों से स्कॉटिंग क्यों बंद ?
दूसरी ओर सांसद प्रतिनिधि मनोज महतो ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पहले वनरक्षियों द्वारा हाथियों के झुंड की नियमित स्कॉटिंग की जाती थी. इससे हाथियों की गतिविधियों की जानकारी ग्रामीणों को समय रहते मिल जाती थी और लोग सतर्क हो जाते थे.
मनोज महतो का आरोप है कि पिछले कई महीनों से स्कॉटिंग व्यवस्था बंद है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हाथियों का झुंड लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में विचरण कर रहा है तो विभाग की निगरानी व्यवस्था सक्रिय क्यों नहीं है.
एक तरफ इलाज की पहल, दूसरी तरफ व्यवस्था पर सवाल
खुचीडीह की घटना के बाद मामला अब ग्रामीण सुरक्षा के साथ राजनीतिक सवालों से भी जुड़ गया है. विधायक सविता महतो की ओर से घायल के इलाज के लिए तत्काल पहल की गई, जबकि सांसद प्रतिनिधि मनोज महतो ने वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नियमित स्कॉटिंग शुरू कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने हाथियों की गतिविधियों की नियमित निगरानी, प्रभावित गांवों को समय रहते अलर्ट करने, वनकर्मियों की सक्रिय तैनाती और आपात स्थिति में तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है.

