चौका: थाना क्षेत्र अंतर्गत खुचीडीह गांव में बुधवार देर शाम आठ हाथियों के झुंड के पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. हाथियों के झुंड को देखकर ग्रामीणों ने उन्हें गांव से भगाने का प्रयास किया. इसी दौरान हाथियों ने संजय महतो पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए.


घटना के बाद घायल संजय महतो को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी. इसके बाद ग्रामीणों ने मजबूरी में उन्हें मोटरसाइकिल से टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) पहुंचाया. इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग की आपातकालीन व्यवस्था और हाथियों से सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कई महीनों से बंद है हाथियों की स्कॉटिंग
इस मामले में सांसद प्रतिनिधि मनोज महतो ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बताया कि पहले वन विभाग के वनरक्षियों द्वारा हाथियों के झुंड की लगातार स्कॉटिंग की जाती थी. वनकर्मी हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते थे और उनके गांवों की ओर बढ़ने की स्थिति में ग्रामीणों को सतर्क किया जाता था. लेकिन पिछले कई महीनों से यह व्यवस्था बंद है.
मनोज महतो के अनुसार, यदि वन विभाग द्वारा पहले की तरह नियमित स्कॉटिंग और निगरानी की व्यवस्था जारी रहती, तो ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिल सकती थी. उन्होंने कहा कि हाथियों के लगातार विचरण से ग्रामीणों की जान-माल पर खतरा बना हुआ है, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती जा रही है.
ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा व्यवस्था की मांग
खुचीडीह की घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी देखी जा रही है. ग्रामीणों का सवाल है कि जब हाथियों का झुंड गांवों के आसपास विचरण कर रहा है, तो वन विभाग की टीम मौके पर सक्रिय क्यों नहीं रहती. वहीं, आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होना भी चिंता का विषय है.
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की नियमित निगरानी और स्कॉटिंग शुरू कराने, प्रभावित गांवों में वनकर्मियों की तैनाती, ग्रामीणों को समय पर अलर्ट करने तथा आपातकालीन स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.
लगातार बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष के बीच खुचीडीह की यह घटना वन विभाग की तैयारियों और ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करती है.
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

