आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने से पहले विभागीय समन्वय को लेकर एक और विवाद सामने आया है. ताजा मामला वार्ड संख्या-20 में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित वेंडिंग जोन का है. योजना के शिलान्यास की तैयारी के बीच कृषि उत्पादन बाजार समिति ने संबंधित जमीन के उपयोग को लेकर आपत्ति जता दी है.


बताया जा रहा है कि वेंडिंग जोन के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली गई है और संभवतः गुरुवार को इसका शिलान्यास होना है. इधर कृषि उत्पादन बाजार समिति की पणन सचिव सरिता दमता ने सवाल उठाया है कि बाजार समिति से एनओसी अथवा विभागीय अनुमति लिए बिना उसकी जमीन पर नगर निगम योजना को कैसे धरातल पर उतार सकता है.
सरकारी आदेश से बाजार समिति को हस्तांतरित है जमीन
सरिता दमता के अनुसार संबंधित जमीन सरकारी आदेश के तहत कृषि उत्पादन बाजार समिति को हस्तांतरित की गई है और मामला राजस्व से भी जुड़ा है. उनका कहना है कि योजना के संबंध में बाजार समिति को पूर्व में सूचित नहीं किया गया. ऐसे में बिना विभागीय अनुमति के उक्त भूमि को वेंडिंग जोन के लिए इस्तेमाल किए जाने का आधार स्पष्ट होना चाहिए. उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी जिले के उपायुक्त सहित संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को दे दी गई है.
मीरूडीह के बाद एक और योजना पर सवाल
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इससे पहले आदित्यपुर नगर निगम के मीरूडीह कचरा ट्रीटमेंट प्लांट योजना स्थानीय विरोध के कारण विवादों में आ चुकी है. वहां प्लांट तैयार होने के बावजूद ग्रामीणों के विरोध के कारण अब तक संचालन शुरू नहीं हो सका है.
ऐसे में वार्ड-20 के वेंडिंग जोन को लेकर शिलान्यास से ठीक पहले जमीन और एनओसी का विवाद सामने आने से नगर निगम की योजनाओं में विभागीय समन्वय और भूमि संबंधी औपचारिकताएं पहले पूरी किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
नगर आयुक्त बोले- जानकारी नहीं, मेयर से नहीं हो सका संपर्क
इस संबंध में आदित्यपुर नगर निगम के नगर आयुक्त एजाज अनवर से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है और संवेदक एवं जनप्रतिनिधि इस संबंध में समझें. वहीं मेयर संजय सरदार से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि बाजार समिति की आपत्ति के बाद प्रस्तावित शिलान्यास होता है या पहले जमीन के उपयोग और विभागीय अनुमति से जुड़े सवालों का समाधान किया जाता है.

