चांडिल: सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के चांडिल जलाशय विस्थापितों की पुनर्वास राशि में कथित अनियमितता और वर्षों से लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को जल संसाधन विभाग की पांच सदस्यीय जांच समिति ने सुनवाई की. घोड़ानेगी स्थित गोल्डन व्यू रिसोर्ट में आयोजित सुनवाई में विस्थापित संगठनों ने 13 करोड़ रुपये से अधिक की पुनर्वास राशि अपात्र लोगों को भुगतान किए जाने का गंभीर आरोप लगाया. हालांकि आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी.


जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के राकेश रंजन महतो और विस्थापित मुक्ति वाहिनी के अंबिका यादव ने समिति के समक्ष पुनर्वास, मुआवजा, विकास और रोजगार से जुड़े मुद्दे रखे.
गांववार भुगतान की जांच की मांग
अंबिका यादव ने आरोप लगाया कि RL 180 मीटर से ऊपर के दस गांवों की पुनर्वास राशि दूसरे गांवों के अपात्र लोगों को दे दी गई. उन्होंने लाभुकों की पात्रता और भुगतान अभिलेखों की गांववार जांच कर गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
जारी विज्ञप्ति के मुताबिक समिति RL 180 से 183 मीटर तक प्रभावित गांवों के भुगतान अभिलेख जांच के लिए रांची ले गई है. नीमडीह प्रखंड के हेवेन गांव में हुए भुगतान पर भी सवाल उठाए गए. हालांकि अभिलेख औपचारिक रूप से जब्त किए गए हैं या नहीं और जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, इस संबंध में समिति की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
116 गांव प्रभावित तो विकास सिर्फ 43 में क्यों ?
मधुश्री महतो ने पुनर्वास के लिए अधिग्रहित भूमि का संबंधित विभाग के नाम हस्तांतरण और अंचल की पंजी-दो में रिकॉर्ड दर्ज करने का मामला उठाया. उन्होंने सवाल किया कि परियोजना से 116 गांव प्रभावित हैं तो विकास कार्य केवल 43 गांवों तक क्यों सीमित हैं.
उन्होंने पिछले चार वर्षों से विकास कार्य ठप रहने और कई आंशिक प्रभावित गांवों के लोगों को विकास पुस्तिका नहीं मिलने का भी आरोप लगाया. संगठनों ने वर्ष 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र विस्थापितों की विकास पुस्तिका बनाने और भविष्य में भुगतान का सत्यापन स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं विस्थापित संगठनों की मौजूदगी में कराने की मांग रखी.
खेतों में पानी, 179 RL से नीचे जलस्तर रखने की मांग
मधुश्री महतो ने कुकड़ू प्रखंड के दयापुर, कुमारी, झापागोड़ा, उदाटांड़, बांदाबीर, केंदुआंदा, चौका, आदरडीह और चानो समेत कई प्रभावित गांवों के धान के खेतों में पानी भरने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने लंबित अनुदान राशि का भुगतान होने तक चांडिल जलाशय का जलस्तर 179 RL से नीचे रखने की मांग की.
विस्थापित संगठनों ने पुनर्वास भूमि का पट्टा देने, परियोजना एवं जलाशय से पानी लेने वाली कंपनियों में विस्थापित युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने और वास्तविक जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य कराने की मांग भी रखी.
विज्ञप्ति के अनुसार जांच समिति में अध्यक्ष आर रॉनिटा के अलावा अजय सिंह बड़ाईक, कुमार अरविन्द, ओंकार नाथ और प्रभाष कुमार दत्ता शामिल हैं. मौके पर अपर निदेशक गौतम कुमार भगत और पुनर्वास पदाधिकारी सुखदेव महतो भी मौजूद थे.
रिपोर्ट: सुमंगल कुंडू

