सरायकेला: गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ कथित दुष्कर्म के गंभीर मामले में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. महिला की लिखित शिकायत के बाद आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. वहीं घटना के दौरान महिला की सुरक्षा और निगरानी में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए गम्हरिया थाना प्रभारी संजय प्रसाद समेत छह पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.


महिला की शिकायत के आधार पर गम्हरिया थाना कांड संख्या 86/26, दिनांक 31.10.2026 दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर सरायकेला एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में SIT गठित की गई है.
पुलिस ने आरोपी नीरज लकड़ा के कमरे से उसके पहने हुए कपड़ों को जब्त किया है, जिन्हें विधिवत FSL रांची भेजने की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस अन्य वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जुटाने में लगी है.
पति से विवाद के बाद सुरक्षा की उम्मीद में थाना पहुंची थी महिला
पुलिस की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार 29-30 अक्टूबर की रात छोटा गम्हरिया के पूर्व पंचायत समिति सदस्य अजीत कुमार सिंह ने थाना प्रभारी को फोन कर एक महिला के बदहाली की स्थिति में पहुंचने की सूचना दी थी. बताया गया था कि महिला के साथ उसके पति ने कथित रूप से मारपीट की है और वह घर से निकलकर मदद मांग रही है.
सूचना पर रात्रि गश्ती में तैनात एएसआई अनिरुद्ध सिंह और हवलदार मुनेश्वर कुमार मौके पर पहुंचे. जांच में दर्ज अनिरुद्ध सिंह के बयान के मुताबिक उन्होंने महिला पुलिसकर्मी साथ नहीं होने के कारण महिला को थाना ले जाने पर आपत्ति भी जताई थी. उनका कहना है कि थाना प्रभारी के निर्देश के बाद महिला को सरकारी वाहन से गम्हरिया थाना लाया गया.
महिला रात करीब डेढ़ बजे थाना पहुंची. इसके बाद उसके रहने की व्यवस्था थाना परिसर में की गई. यहीं से महिला की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल शुरू होते हैं.
पुलिस निरीक्षक के कार्यालय में रखी गई महिला, फिर ऑपरेटर के कमरे तक कैसे पहुंची ?
जांच में दर्ज एएसआई मनोज साहू के बयान के मुताबिक महिला को पहले ओडी के सामने सोफे पर बैठाया गया था. ठंड लगने की बात सामने आने के बाद उसे पुलिस निरीक्षक के कार्यालय में रखा गया और बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी गई. इस दौरान वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा थाना परिसर में मौजूद था.
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि सुरक्षा के लिए रखी गई महिला पुलिस निरीक्षक के कार्यालय से बाहर कैसे निकली और वायरलेस ऑपरेटर के कमरे तक कैसे पहुंच गई. जांच में संबंधित पुलिसकर्मियों ने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही है.
सुबह महिला गायब मिली तो मचा हड़कंप
जांच रिपोर्ट में दर्ज बयान के मुताबिक सुबह करीब 4:30 से 4:45 बजे के बीच महिला अपने निर्धारित कमरे में नहीं मिली. इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई. महिला की चप्पल वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा के कमरे के बाहर दिखाई देने के बाद संदेह गहरा गया.
ऑपरेटर के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. आवाज देने और दरवाजा खुलवाने के प्रयास के बावजूद तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर पुलिसकर्मियों ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया.
आरक्षी संतोष राय ने जांच अधिकारी को दिए अपने बयान में कमरे के अंदर महिला और वायरलेस ऑपरेटर को आपत्तिजनक स्थिति में देखने का दावा किया है. यह जांच में दर्ज एक पुलिसकर्मी का बयान है. महिला ने बाद में अपने साथ गलत होने का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दी, जिसके बाद मामला आपराधिक अनुसंधान के दायरे में आ गया.
महिला की शिकायत पर FIR, नीरज लकड़ा गिरफ्तार
महिला की लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने आरोपी के कमरे से उसके पहने हुए कपड़ों को भी जब्त किया है. इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है. अब महिला के बयान, मेडिकल एवं फोरेंसिक साक्ष्य, थाना परिसर के उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर SIT मामले की जांच आगे बढ़ाएगी.
आरोपी की गिरफ्तारी आरोपों की गंभीरता को देखते हुए की गई कानूनी कार्रवाई है. आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
SDPO की जांच में थाना स्तर पर गंभीर चूक
इस पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू गम्हरिया थाना की आंतरिक कार्यप्रणाली है. एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज ने थाना पहुंचकर घटना की प्रारंभिक जांच की और थाना प्रभारी से लेकर उस रात ड्यूटी पर मौजूद पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों के बयान दर्ज किए.
जांच रिपोर्ट में थाना प्रभारी संजय प्रसाद, एएसआई अनिरुद्ध सिंह, एएसआई मनोज साहू और आरक्षी संतोष राय के संबंध में पूरे घटनाक्रम के दौरान घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और गैर जिम्मेदाराना आचरण परिलक्षित होने की बात कही गई और इनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई. इसके बाद एसपी स्तर से मामले में व्यापक जिम्मेदारी तय करते हुए कुल छह पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई.
SP का सख्त संदेश- महिला सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए न केवल आरोपी वायरलेस ऑपरेटर की गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई, बल्कि थाना स्तर पर हुई चूक की जवाबदेही भी तय करने की कार्रवाई शुरू की. थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मियों का निलंबन इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि मामला केवल आरोपी वायरलेस ऑपरेटर तक सीमित नहीं रखा गया. सवाल यह भी है कि रात में सुरक्षा के लिए थाना लाई गई महिला की निगरानी किसके जिम्मे थी, महिला पुलिसकर्मी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई और वह निर्धारित कमरे से निकलकर दूसरे पुलिसकर्मी के कमरे तक कैसे पहुंच गई.
SIT के सामने कई अहम सवाल
अब एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व वाली SIT के सामने महिला के आरोप की तह तक पहुंचने के साथ पूरे घटनाक्रम की सटीक टाइमलाइन स्थापित करने की चुनौती है. महिला को थाना लाए जाने से लेकर आरोपी के कमरे में मिलने तक कौन-कौन पुलिसकर्मी मौजूद थे, किसे कब क्या जानकारी मिली और किस स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ, इसकी जांच महत्वपूर्ण होगी. फोरेंसिक जांच भी इस मामले में अहम कड़ी साबित हो सकती है. पुलिस आरोपी के कपड़ों सहित उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक जांच के दायरे में ला रही है.
फिलहाल आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा सलाखों के पीछे है, थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं और SIT पूरे प्रकरण की जांच में जुटी है. अब जांच के निष्कर्ष तय करेंगे कि आपराधिक आरोपों के साथ इस पूरे घटनाक्रम में और किस-किस स्तर पर जवाबदेही बनती है.

