चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ और गोईलकेरा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई 58 करोड़ रुपये की पोड़ाहाट, सोनुआ और बिला जलापूर्ति योजना वर्षों बाद भी पूरी नहीं हो सकी है. योजना के अधर में लटके रहने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. अब ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है.


रविवार को बिला क्षेत्र में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अधूरी जलापूर्ति योजना को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में निर्णय लिया गया कि योजना को शीघ्र पूरा करने और जलापूर्ति शुरू कराने की मांग को लेकर 10 जून को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, चक्रधरपुर कार्यालय का घेराव किया जाएगा.
जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में पनसुआँ डैम से सोनुआ और गोईलकेरा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने के लिए 58 करोड़ रुपये की लागत से इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई थी. योजना के तहत बिला क्षेत्र में जलमीनार और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण भी कराया गया, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है.

बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व प्रत्याशी एवं जिला मुखिया संघ के वरीय उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल की सुविधा से वंचित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय उदासीनता और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण योजना समय पर पूरी नहीं हो सकी.
प्रखंड प्रमुख निरुमणि कोड़ाह ने कहा कि यदि योजना की नियमित निगरानी और जवाबदेही तय की गई होती, तो ग्रामीणों को वर्षों पहले ही इसका लाभ मिलना शुरू हो जाता. उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग को इस मामले में जवाब देना होगा.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द जलापूर्ति शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. बैठक के अंत में सभी ने “अधूरी योजना नहीं चलेगी, हर घर तक जल पहुंचाना होगा” का संकल्प लिया.
बैठक में बिला पंचायत की मुखिया लाडुगी कुई, गोईलकेरा पंचायत की मुखिया सुनीता मेराल, पंचायत समिति सदस्य निरंजन पूर्ति, विभिन्न पंचायतों की जल सहियाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
रिपोर्ट: जयंत प्रमाणिक



