आदित्यपुर: नगर निगम चुनाव संपन्न हुए करीब एक महीना बीत चुका है और नगर की नई सरकार भी अस्तित्व में आ गई है. एक ओर जनप्रतिनिधियों के स्वागत- सम्मान का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी समस्याओं को लेकर जनता का गुस्सा अब सामने आने लगा है. नगर के विभिन्न वार्डों में साफ- सफाई, बिजली और पानी की समस्याओं को लेकर लोग सीधे पार्षदों को जिम्मेदार ठहराने लगे हैं.

स्थिति यह है कि वार्ड पार्षद जब इन समस्याओं को लेकर नगर निगम या मेयर- डिप्टी मेयर से शिकायत करते हैं, तो उन्हें बोर्ड बैठक होने तक इंतजार करने की बात कहकर टाल दिया जा रहा है.
इधर नगर निगम के अधिकारी और कर्मी भी अपने स्तर पर ही सफाई, कचरा उठाव और जलापूर्ति का काम कर रहे हैं. आरोप है कि इन कार्यों में न तो पार्षदों से कोई सलाह ली जा रही है और न ही मेयर- डिप्टी मेयर को विश्वास में लिया जा रहा है.
इस कारण कई वार्डों में व्यवस्था चरमराई हुई है और जनता को रोजमर्रा की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि चुनाव के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती हैं, तो जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. नगर में उत्पन्न यह स्थिति प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.

