सरायकेला: दीपावली के मौके पर पटाखों की बिक्री को लेकर सरायकेला- खरसावां जिला प्रशासन की कार्रवाई के बीच अब लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं. पटाखा कारोबारियों का दावा है कि उन्होंने करीब एक महीने पहले ही अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन जमा कर दिया था, लेकिन दीपावली नजदीक आने के बावजूद उनके आवेदनों पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ. दूसरी ओर बिना लाइसेंस पटाखा बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है.


शनिवार को गम्हरिया क्षेत्र में अंचल अधिकारी की ओर से पटाखा दुकानदारों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद कारोबारियों में नाराजगी बढ़ गई. उनका सवाल है कि जब आवेदन समय पर लिया गया था तो उसे स्वीकृत अथवा अस्वीकृत करने का निर्णय भी समय रहते क्यों नहीं लिया गया ?
आवेदन एक महीने पहले, त्योहार आया फिर भी लाइसेंस का इंतजार
दुकानदारों का दावा है कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद वे लगातार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे. उन्हें उम्मीद थी कि दीपावली से पहले लाइसेंस जारी हो जाएगा. इसी उम्मीद में कई छोटे कारोबारियों ने पटाखों का स्टॉक भी मंगा लिया.
अब लाइसेंस नहीं मिलने और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कारोबारियों का कहना है कि यदि उनका आवेदन नियमों के अनुरूप नहीं था तो प्रशासन को समय रहते इसकी सूचना देनी चाहिए थी. यदि कोई दस्तावेज कम था तो उसे पूरा करने का अवसर दिया जा सकता था. आवेदन लंबित रखकर त्योहार के समय कार्रवाई करना उन्हें दोहरी मार देने जैसा है.
बिना लाइसेंस बिक्री गलत, लेकिन प्रशासन की जिम्मेदारी भी कम नहीं
इस मामले में यह भी स्पष्ट है कि पटाखा अत्यधिक संवेदनशील और विस्फोटक सामग्री है. इसकी बिक्री में लाइसेंस और सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है. बिना वैध अनुमति बिक्री को केवल आर्थिक मजबूरी के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता.
लेकिन इसके साथ दूसरा सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है. यदि कारोबारियों ने निर्धारित समय पर आवेदन किया था तो उन आवेदनों पर फैसला कब और किस स्तर पर होना था ? कितने आवेदन प्राप्त हुए, कितने स्वीकृत हुए, कितने अस्वीकृत किए गए और कितने अब भी लंबित हैं ? जिला प्रशासन को इन तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
गरीब दुकानदार पर कार्रवाई आसान, फाइल रोकने वाले पर क्या कार्रवाई ?
कारोबारियों का आरोप है कि प्रशासन अपनी प्रक्रियागत जिम्मेदारी की समीक्षा करने के बजाय छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई कर रहा है. यदि जांच में यह साबित होता है कि आवेदन समय पर और आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा किए गए थे, फिर भी अधिकारियों के स्तर से अनावश्यक देरी हुई, तो संबंधित स्तर की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.
सवाल सीधा है- बिना लाइसेंस बिक्री करने पर दुकानदार जवाबदेह है, तो समय पर लाइसेंस आवेदन का निपटारा नहीं करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही क्यों नहीं तय होनी चाहिए?
जिला प्रशासन बताए- लाइसेंस क्यों नहीं मिला ?
इस विवाद को समाप्त करने का सबसे बेहतर तरीका पारदर्शिता है. जिला प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि पटाखा बिक्री के लिए कुल कितने आवेदन आए, आवेदन की अंतिम तारीख क्या थी, कितने लाइसेंस जारी किए गए और जिन आवेदकों को लाइसेंस नहीं मिला, उनके आवेदन अस्वीकृत हुए या लंबित हैं.
यदि आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं तो उसका कारण संबंधित आवेदकों को बताया जाना चाहिए. वहीं यदि प्रशासनिक स्तर पर फाइल लंबित रहने के कारण लाइसेंस जारी नहीं हो सके तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
कानून का पालन केवल दुकानदारों से कराने तक सीमित नहीं हो सकता. व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी कायम होगी, जब नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के साथ नियमों के तहत आए आवेदनों का समयबद्ध और पारदर्शी निपटारा भी सुनिश्चित हो.
प्रमोद सिंह (संपादक)

