आदित्यपुर: करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से वार्ड संख्या-20 में प्रस्तावित वेंडिंग जोन के शिलान्यास से पहले ही जमीन और NOC को लेकर विभागीय समन्वय पर सवाल खड़े हो गए हैं. कृषि उत्पादन बाजार समिति ने जिस जमीन को सरकारी आदेश के तहत अपने विभाग को हस्तांतरित बताया है, उसी जमीन पर नगर निगम वेंडिंग जोन बनाने की तैयारी में है. अब नगर निगम, बाजार समिति और अंचल कार्यालय के अलग-अलग पक्ष सामने आने के बाद मामला और उलझ गया है.


खबर सामने आने के बाद मेयर संजय सरदार ने फोन पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “नगर निगम को NOC की क्या जरूरत है? हमें अंचल से NOC मिला है.” हालांकि बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि जमीन किसी संबंधित विभाग के अधीन है तो उस विभाग की NOC आवश्यक है.
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि जमीन कृषि उत्पादन बाजार समिति को हस्तांतरित है तो क्या केवल अंचल स्तर की सहमति के आधार पर वहां करीब तीन करोड़ की परियोजना का शिलान्यास किया जा सकता है ?
CO बोले- जमीन चिह्नित की, बाजार समिति की है तो देखना होगा
मामले में अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार का पक्ष भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि उनके पास बाजार समिति की ओर से किसी प्रकार की आपत्ति आने की जानकारी नहीं है. यदि कोई आपत्ति आई भी है तो वह फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है. उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि उनके स्तर से जमीन चिह्नित की गई है. साथ ही कहा कि यदि संबंधित जमीन कृषि उत्पादन बाजार समिति की है तो उस पहलू को देखना होगा.
ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस जमीन पर करोड़ों रुपये की योजना प्रस्तावित है, उसकी विभागीय स्थिति और आवश्यक अनुमतियां शिलान्यास से पहले पूरी तरह स्पष्ट क्यों नहीं की गईं ?
बाजार समिति की आपत्ति- हमें बताए बगैर हमारी जमीन पर योजना कैसे ?
कृषि उत्पादन बाजार समिति की सचिव सरिता दमता पहले ही योजना पर आपत्ति जता चुकी हैं. उनका कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी आदेश के तहत कृषि उत्पादन बाजार समिति को हस्तांतरित है. यह राजस्व से जुड़ा मामला भी है. ऐसे में समिति को सूचना दिए अथवा विभागीय अनुमति लिए बिना नगर निगम वहां वेंडिंग जोन कैसे बना सकता है ? उन्होंने मामले की जानकारी उपायुक्त सहित सक्षम अधिकारियों को दिए जाने की बात कही है.
तीन विभाग, तीन तस्वीरें… आखिर जमीन पर स्थिति क्या है ?
पूरे मामले में फिलहाल दिलचस्प स्थिति बन गई है. बाजार समिति जमीन पर अपना अधिकार बता रही है. मेयर अंचल से NOC मिलने की बात कह रहे हैं और अंचल अधिकारी जमीन चिह्नित करने की पुष्टि करते हुए कह रहे हैं कि यदि जमीन बाजार समिति की है तो उसे देखना होगा. वही नगर आयुक्त का कहना है कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं संवेदक और माननीय जनप्रतिनिधि जाने.
ऐसे में करीब तीन करोड़ रुपये की सार्वजनिक राशि से बनने वाली परियोजना को लेकर बुनियादी सवाल यही है कि निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित जमीन की वैधानिक और विभागीय स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है या नहीं ?
मीरूडीह के बाद फिर समन्वय पर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब आदित्यपुर नगर निगम की किसी परियोजना को धरातल पर उतारने के दौरान विवाद सामने आया है. मीरूडीह में कचरा ट्रीटमेंट प्लांट तैयार होने के बाद स्थानीय विरोध के कारण संचालन का मामला उलझा हुआ है.
अब वेंडिंग जोन के मामले में निर्माण शुरू होने से पहले ही जमीन और NOC का सवाल सामने आ गया है. ऐसे में बगैर स्पष्ट अंतरविभागीय समन्वय के परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
वेंडिंग जोन शहर और फुटपाथी दुकानदारों के हित से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है. विवाद योजना की उपयोगिता पर नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया पर है जिसके तहत इसे धरातल पर उतारने की तैयारी की जा रही है. यदि जमीन बाजार समिति की है तो उसकी अनुमति का सवाल महत्वपूर्ण है और यदि नहीं है तो प्रशासन को दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. अब देखना होगा कि प्रस्तावित शिलान्यास से पहले NOC की इस उलझी हुई तस्वीर को प्रशासन साफ करता है या विवाद के बीच ही करीब तीन करोड़ की योजना की नींव रख दी जाती है.

