सरायकेला: गम्हरिया थाना परिसर में महिला और वायरलेस ऑपरेटर से जुड़े गंभीर प्रकरण में हुई प्रारंभिक जांच ने थाना की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर सरायकेला एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज द्वारा की गई जांच में थाना प्रभारी संजय प्रसाद, एएसआई अनिरुद्ध सिंह, एएसआई मनोज साहू और आरक्षी संतोष राय की भूमिका में लापरवाही और अनुशासनहीनता पाए जाने का उल्लेख करते हुए इनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. शनिवार को पुलिस अधीक्षक को भेजी गई जांच रिपोर्ट में घटना की रात से लेकर सुबह तक की परिस्थितियों और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयानों को दर्ज किया गया है. इससे पूर्व महिला की शिकायत पर आरोपी वायरलेस ऑपरेटर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जबकि महिला को मेडिल जांच के लिए भेजा गया है.


महिला को थाना लाने पर पहले ही जताई गई थी आपत्ति
जांच रिपोर्ट के मुताबिक महिला अपने पति द्वारा कथित मारपीट किए जाने के बाद छोटा गम्हरिया पहुंची थी. पूर्व पंचायत समिति सदस्य अजीत कुमार सिंह की सूचना पर पुलिस पहुंची. एएसआई अनिरुद्ध सिंह ने अपने बयान में कहा कि महिला पुलिसकर्मी साथ नहीं होने के कारण उन्होंने महिला को थाना ले जाने पर आपत्ति जताई थी. उनके मुताबिक उन्होंने थाना प्रभारी को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन बाद में थाना प्रभारी के निर्देश पर महिला को थाना लाया गया. रिपोर्ट में दर्ज बयान के अनुसार महिला रात करीब 1:15 से 1:30 बजे के बीच थाना पहुंची. इसके बाद उसे ओडी के सामने बैठाया गया और बाद में पुलिस निरीक्षक के कार्यालय में रखकर बाहर से कुंडी लगा दी गई.
महिला ऑपरेटर के कमरे तक कैसे पहुंची, किसी को पता नहीं ?
एएसआई मनोज साहू के बयान के मुताबिक वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा उस समय थाना परिसर में मौजूद था. बाद में महिला पुलिस निरीक्षक के कार्यालय से निकलकर नीरज के कमरे में कैसे पहुंची, इसकी जानकारी उन्हें नहीं हुई. यहीं थाना की निगरानी व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. एक महिला को सुरक्षा के उद्देश्य से थाना परिसर में रखा गया था तो उसके कमरे की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी ? कमरे की कुंडी किसने खोली और वह वायरलेस ऑपरेटर के कमरे तक कैसे पहुंची ?
सुबह बंद मिला कमरा, बयानों में सामने आई गंभीर परिस्थितियां
जांच रिपोर्ट में दर्ज एएसआई मनोज साहू के बयान के मुताबिक सुबह करीब 4:30 से 4:45 बजे महिला निर्धारित कमरे में नहीं मिली. तलाश के दौरान उसका चप्पल वायरलेस ऑपरेटर नीरज के कमरे के बाहर दिखाई दिया. कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. काफी आवाज देने और दरवाजा खोलने का प्रयास करने के बाद उसे खोला गया.
आरक्षी संतोष राय के बयान में इससे भी गंभीर दावा दर्ज है. उसने जांच अधिकारी को बताया कि खिड़की की ओर से देखने पर महिला और नीरज कथित तौर पर नग्न अवस्था में सोए दिखाई दिए. यह संतोष राय का जांच में दर्ज बयान है, जिसकी सत्यता और इससे जुड़े अन्य पहलुओं का अंतिम निर्धारण विस्तृत जांच एवं कानूनी प्रक्रिया में होना है.
रिपोर्ट का अहम सवाल- महिला की सुरक्षा में जिम्मेदारी किसकी थी ?
जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी नहीं थी. महिला को थाना लाने, उसके रहने की व्यवस्था करने, निगरानी रखने और बाद में उसके निर्धारित कमरे से निकलकर वायरलेस ऑपरेटर के कमरे तक पहुंच जाने के बीच कई स्तर पर सुरक्षा और पर्यवेक्षण संबंधी सवाल सामने आए हैं.
थाना प्रभारी के बयान के अनुसार उन्होंने महिला को थाना लाने का निर्देश दिया था, जबकि बाद की परिस्थितियों की जानकारी उन्हें नहीं दिए जाने की बात कही गई. वहीं अन्य बयानों में अलग- अलग समय पर थाना प्रभारी को फोन से जानकारी देने का उल्लेख है. ऐसे में किस अधिकारी को कब और कितनी जानकारी थी, यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है.
SDPO की रिपोर्ट- चारों की ‘घोर लापरवाही’ परिलक्षित
जांच के निष्कर्ष में एसडीपीओ ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि थाना प्रभारी संजय प्रसाद, एएसआई अनिरुद्ध सिंह, एएसआई मनोज साहू और आरक्षी संतोष राय के पूरे घटनाक्रम में “घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं गैर जिम्मेदार” आचरण परिलक्षित हुआ है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घटना से पुलिस की छवि धूमिल हुई है. इसी आधार पर चारों पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा पुलिस अधीक्षक से की गई है.
अब एसपी के स्तर से कार्रवाई पर निगाह
एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट ने फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए आरोप के अंतिम कानूनी निष्कर्ष के बजाय थाना स्तर पर हुई चूक और पुलिसकर्मियों की विभागीय जवाबदेही को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है. अब निगाह पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के स्तर से होने वाली विभागीय कार्रवाई और महिला की शिकायत से जुड़े मामले की आगे की जांच पर है. साथ ही आरोपी वायरलेस ऑपरेटर की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों की कानूनी जांच अलग से महत्वपूर्ण होगी.
क्या है घटनाक्रम
गौरतलब है कि दुग्धा गांव की रहने वाली महिला गुरुवार रात अपने पति द्वारा मारपीट की शिकायत के बाद सुरक्षा के लिए गम्हरिया थाना लाई गई थी. उसे थाना परिसर के एक कमरे में रखा गया था. आरोप है कि बाद में वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा ने कमरे का ताला खोला और महिला को अपने कमरे में ले गया. शुक्रवार सुबह महिला और वायरलेस ऑपरेटर के उसके कमरे में मिलने के बाद मामला सामने आया. बाद में महिला ने अपने साथ गलत होने का आरोप लगाया और लिखित शिकायत दी.

