सरायकेला: चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने अब तक जिला में कोई बड़ी तबाही नहीं मचाई है, लेकिन उससे पहले बिजली विभाग की व्यवस्था ने आदित्यपुर के आवासीय क्षेत्र में ऐसा ‘कोहराम’ मचा रखा है कि जनता त्राहिमाम कर रही है. मंगलवार शाम करीब चार बजे से शुरू हुई बिजली की आंख-मिचौली बुधवार पूर्वाह्न तक जारी है. कमोबेश सभी फीडरों से जुड़े उपभोक्ता पावर कट और अनियमित आपूर्ति से परेशान हैं. सवाल अब केवल बिजली कब आएगी का नहीं, बल्कि सालभर मेंटेनेंस के नाम पर लिए जाने वाले शटडाउन के बावजूद व्यवस्था पहली चुनौती में ही क्यों चरमरा गई, इसका भी है.


सबसे हैरान करने वाली स्थिति यह है कि उपभोक्ता समस्या जानना चाहते हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. लोगों की शिकायत है कि जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं. किस फीडर में क्या खराबी है, बिजली कब सामान्य होगी और लगातार कटौती की वास्तविक वजह क्या है, इसका स्पष्ट जवाब देने वाला कोई नहीं है.
सालभर शटडाउन लेकर कैसा मेंटेनेंस हुआ ?
आदित्यपुर में बिजली विभाग समय-समय पर लाइन और उपकरणों के मेंटेनेंस का हवाला देकर घंटों शटडाउन लेता रहा है. तब उपभोक्ताओं से बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए असुविधा सहने की अपेक्षा की जाती है. अब सवाल यह है कि यदि नियमित रूप से मेंटेनेंस हुआ तो मौसम की बड़ी मार पड़ने से पहले ही फीडर क्यों हांफने लगे ? बार-बार ट्रिपिंग, लंबे पावर कट और समस्या की स्पष्ट जानकारी तक उपलब्ध नहीं होना विभाग की तैयारी और मेंटेनेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
मेंटेनेंस पर खर्च की भी हो जांच
लगातार सामने आ रही समस्या के बाद अब यह जानना भी जरूरी हो गया है कि पिछले कुछ वर्षों में आदित्यपुर विद्युत क्षेत्र में मेंटेनेंस के नाम पर कितनी राशि खर्च हुई, किन-किन फीडरों पर क्या काम कराया गया और उन कार्यों का परिणाम क्या रहा ? केवल ‘मेंटेनेंस’ कहकर शटडाउन लेना पर्याप्त नहीं है. यदि सरकारी राशि खर्च हुई है तो उसका असर बिजली व्यवस्था में दिखाई भी देना चाहिए.
मेंटेनेंस में घोटाले की आशंका को बिना जांच तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन मौजूदा हालात खर्च और कार्यों के तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट की जरूरत जरूर पैदा करते हैं. विभाग को सार्वजनिक करना चाहिए कि फीडरवार मेंटेनेंस पर कितना खर्च हुआ और कौन-कौन से काम पूरे किए गए.
अंडरग्राउंड केबलिंग आज तक अधूरी क्यों ?
आदित्यपुर में अंडरग्राउंड केबलिंग का काम पूरा नहीं होना भी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. यदि इस परियोजना पर सरकारी राशि खर्च की गई है तो विभाग को बताना चाहिए कि इसकी स्वीकृत लागत क्या थी, काम कब शुरू हुआ, कितना काम पूरा हुआ, कितनी राशि खर्च हुई और शेष काम कब तक पूरा होगा.
असली परीक्षा तो अभी बाकी है
चिंता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक खराब मौसम का प्रभाव अभी बना हुआ है. तेज हवा और भारी बारिश के दौरान बिजली के तार, खंभे और ट्रांसफॉर्मर प्रभावित होने का वास्तविक खतरा रहता है. जब सामान्य परिस्थितियों में ही व्यवस्था लड़खड़ा रही है तो गंभीर मौसम के दौरान विभाग किस तैयारी के सहारे निर्बाध अथवा त्वरित बिजली बहाली का दावा करेगा ? आदित्यपुर की जनता को अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए. मेंटेनेंस कहां हुआ, कितना पैसा खर्च हुआ, अंडरग्राउंड केबलिंग क्यों अधूरी है और मंगलवार शाम चार बजे से बिजली व्यवस्था आखिर किस कारण चरमराई है ? बिजली विभाग को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए.

