जामताड़ा: कांग्रेस के संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 में हुए जामताड़ा जिलाध्यक्ष के चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता नंदकिशोर सिंह ने चुनाव की मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिला कार्यकारिणी में मिला उपाध्यक्ष पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने पद से इस्तीफा देते हुए दावा किया कि यदि मतगणना निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होती तो वे जिलाध्यक्ष बनते.


नंदकिशोर सिंह के मुताबिक जिलाध्यक्ष चुनाव के लिए कांग्रेस ने विधिवत प्रक्रिया अपनाई थी. चुनाव संपन्न कराने के लिए पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री अरुण यादव, बोकारो विधायक श्वेता सिंह और बरही विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी अरुण साहू को पर्यवेक्षक बनाया गया था. छह प्रखंडों और दो नगर क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई.
उनका आरोप है कि मतदान के बाद मतगणना के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए और परिणाम को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई. चुनाव मैदान में नंदकिशोर सिंह के अलावा दीपिका बेसरा और विजय दुबे थे. बाद में दीपिका बेसरा को जिला कांग्रेस अध्यक्ष घोषित किया गया.
1983 से कांग्रेस में, अब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
नंदकिशोर सिंह ने कहा कि वे वर्ष 1983 से कांग्रेस से जुड़े हैं. छात्र राजनीति से लेकर संगठन की विभिन्न जिम्मेदारियों तक करीब चार दशक पार्टी के लिए काम करने के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर ऐसी स्थिति उनके लिए पीड़ादायक है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी पद को लेकर व्यक्तिगत लड़ाई का नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता का है. उनका दावा है कि मतगणना का पूरा परिणाम सामने रखा जाता तो तस्वीर अलग होती.
उपाध्यक्ष का पत्र लौटाने से बढ़ी सियासी हलचल
जिला कार्यकारिणी की बैठक में नंदकिशोर सिंह को उपाध्यक्ष पद का पत्र दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे तत्काल वापस कर दिया. वरिष्ठ नेता के इस कदम के बाद जामताड़ा कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों और असंतोष की चर्चा तेज हो गई है.
अब बड़ा सवाल यह है कि संगठन को लोकतांत्रिक तरीके से मजबूत करने के उद्देश्य से चलाए गए संगठन सृजन कार्यक्रम की मतगणना पर उठे इन आरोपों पर कांग्रेस नेतृत्व क्या जवाब देता है. नंदकिशोर सिंह के आरोपों पर पार्टी अथवा जिला नेतृत्व का पक्ष सामने आने पर पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

