राजनगर: संताली भाषा और ओल चिकी लिपि के संरक्षण एवं प्रचार- प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आने की जरूरत है. अपनी भाषा और लिपि को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ओल चिकी सीखना जरूरी है. उक्त बातें सिंहभूम सांसद जोबा माझी ने रविवार को राजनगर के बाघरायसाई स्थित आदिवासी कला- सांस्कृतिक भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं.


सत्य नारायण सोशियो इकोनॉमी एंड रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संताली भाषा एवं ओल चिकी से संबंधित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
सांसद जोबा माझी ने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा विकसित ओल चिकी लिपि के प्रचार- प्रसार के 100 वर्ष पूरे होना समाज के लिए गौरव की बात है. लोग हिंदी, अंग्रेजी, बंगला और उड़िया सहित दूसरी भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी संताली भाषा और ओल चिकी लिपि से भी जुड़े रहें.
उन्होंने कहा कि संताली भाषा में शिक्षा के विस्तार और ओल चिकी शिक्षकों की आवश्यकता से सरकार को अवगत कराया गया है. आने वाले दिनों में शिक्षकों की नियुक्ति की संभावना है. भाषा और लिपि से जुड़े मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखने का प्रयास जारी रहेगा.
विशिष्ट अतिथि झामुमो नेता प्रो. कालीपद सोरेन ने भाषा, लिपि और सरना सहित समाज से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुटता पर जोर दिया. ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के सह सचिव मनीक हांसदा ने भी अपने विचार रखे.
राजनगर में 348, घाटशिला में 195 ने दी थी परीक्षा
सेंटर की ओर से 30 अगस्त को राजनगर और घाटशिला में परीक्षा आयोजित की गई थी. इसमें राजनगर केंद्र पर 348 और घाटशिला में 195 परीक्षार्थी शामिल हुए थे. इनमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को रविवार को सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम में झामुमो केंद्रीय सदस्य बिशु हेम्ब्रम, बुद्धिजीवी मोर्चा जिलाध्यक्ष दुर्गा लाल मुर्मू, प्रखंड अध्यक्ष रामसिंह हेम्ब्रम, उपाध्यक्ष भक्तू मार्डी, संस्थापक सत्य नारायण मुर्मू, परीक्षा नियंत्रक राजकुमार मार्डी सहित अन्य लोग मौजूद रहे.

