सरायकेला: कांड्रा थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती हुदू पंचायत के ऊपरबेड़ा गांव में जमीन विवाद को लेकर उत्पन्न तनाव के बीच बड़ी अपडेट सामने आई है. पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में भेजे गए विशेष पुलिस बल ने ग्रामीणों के घेरे से इंडिया न्यूज वायरल बिहार-झारखंड के पत्रकार विपिन वार्ष्णेय को सुरक्षित मुक्त करा लिया है. पत्रकार पूरी तरह सकुशल हैं.


हालांकि तुमसा सरकारी स्कूल मैदान में कथित तौर पर बंधक बनाए गए एक ही परिवार के चार सदस्य भृगु राम सरदार, जटल सरदार, हबलू सरदार और करुणा सरदारिन अभी भी ग्रामीणों के कब्जे में बताए जा रहे हैं. ग्रामीण फिलहाल उन्हें छोड़ने के लिए राजी नहीं हैं. पुलिस ग्रामीणों से लगातार बातचीत कर शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने का प्रयास कर रही है.
अब सामने आया ग्रामीणों का पक्ष
मामले में अब ग्रामीणों का पक्ष भी सामने आया है. ग्रामीणों के चंगुल से मुक्त होने के बाद पत्रकार विपिन वार्ष्णेय ने बताया कि ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित परिवार उन्हें लंबे समय से प्रताड़ित करता रहा है. उनका दावा है कि परिवार खुद को जमींदार बताकर जमीन पर कब्जा करने पहुंच जाता है, ग्रामीणों को गांव के तालाब में स्नान करने से रोकता है और कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान करता है. यही कारण है कि जबतक कार्तिक सरदार सामने नहीं अता बंधको को नहीं छोड़ा जाएगा.
दूसरी ओर कार्तिक सरदार का आरोप है कि उसके पूर्वजों ने माझी परिवार को गांव में बसने के लिए जमीन दी थी और अब धीरे-धीरे उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है. उसने अपने परिवार के साथ मारपीट, घर और मंदिरों में तोड़फोड़ तथा बहन के साथ छेड़खानी के भी आरोप लगाए हैं. दोनों पक्षों के आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है.
इससे पहले सोमवार को कांड्रा थाना प्रभारी विनोद मुर्मू पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे थे. उनके साथ कवरेज के लिए पत्रकार विपिन वार्ष्णेय भी गए थे. ग्रामीणों ने पुलिस टीम और पत्रकार को घेर लिया था.
स्थिति गंभीर होने के बाद एसपी मनोज स्वर्गीयारी ने अतिरिक्त पुलिस बल भेजने का निर्देश दिया. इसके बाद एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर पत्रकार को सुरक्षित बाहर निकाला.
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चारों बंधकों को सुरक्षित मुक्त कराना और दोनों पक्षों के जमीन विवाद का शांतिपूर्ण समाधान कराना है. पुलिस ग्रामीणों से वार्ता कर रही है. अब नजर इस बात पर है कि बातचीत से गतिरोध टूटता है या पुलिस को चारों बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए कोई अन्य कानूनी कदम उठाना पड़ता है.

