जामताड़ा: सरकारी राशन व्यवस्था में अपात्र लाभुकों की मौजूदगी रोकने के लिए चल रही जांच ने जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की तस्वीर सामने ला दी है. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के KPI (V2) आंकड़ों के अनुसार जामताड़ा जिले में 24,119 मामले जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं. इनमें से 2,873 मामलों में नाम हटाने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 21,235 मामले अब भी लंबित हैं. विभागीय रिपोर्ट में कुल कार्रवाई 2,884 मामलों में दर्ज है और प्रगति 11.96 प्रतिशत बतायी गयी है. आंकड़े सवाल खड़ा करते हैं कि यदि इतने बड़े पैमाने पर अपात्रता की आशंका सामने आ रही है, तो अब तक सरकारी राशन का लाभ किन लोगों तक पहुंचता रहा? वहीं, हजारों मामलों के लंबित रहने से यह भी सवाल उठ रहा है कि सत्यापन प्रक्रिया की गति आखिर इतनी धीमी क्यों है.


10 हजार से अधिक ‘साइलेंट लाभुक’ चिन्हित
जिले में सबसे बड़ी संख्या साइलेंट लाभुकों की है. ऐसे 10,283 लाभुक चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने लंबे समय से राशन का उठाव नहीं किया है. इनमें 9,821 मामले लंबित हैं, जबकि 459 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है. इसके अलावा 8,486 डुप्लीकेट लाभुक, 1,910 इनकम ग्रुप, 350 वाहन स्वामित्व, 324 सौ वर्ष से अधिक आयु वाले आरसी सदस्य, 2,292 ऐसे एकल सदस्य जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है, 234 सकल कारोबार, 181 Individual as Director, 35 PFMS, 21 Postal और तीन आधार स्टेटस से जुड़े मामले भी विभागीय जांच के दायरे में हैं.

आयकरदाता और चारपहिया वाहन मालिक भी जांच के घेरे में
जिला आपूर्ति पदाधिकारी कयूम अंसारी के अनुसार विभाग को निर्देश मिला है कि छह महीने से एक वर्ष तक राशन नहीं उठाने वाले लाभुकों की जांच की जाए. इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले, चारपहिया वाहन रखने वाले और अन्य निर्धारित अपात्र श्रेणी में आने वाले लाभुकों के नाम भी राशन कार्ड से हटाए जाने हैं. विभाग के अनुसार इसके लिए भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है. सत्यापन में अपात्र पाए जाने पर राशन कार्ड से संबंधित व्यक्ति का नाम हटाने की कार्रवाई की जा रही है.

असली सवाल: जांच की रफ्तार इतनी धीमी क्यों ?
24,119 चिन्हित मामलों में अभी 21 हजार से अधिक मामले लंबित हैं. यानी बड़ी संख्या में मामलों का अंतिम सत्यापन अभी बाकी है. ऐसे में सरकारी खाद्यान्न योजना की पारदर्शिता पर सवाल स्वाभाविक है. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन लाभुकों ने महीनों से राशन नहीं उठाया, उनकी पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी? डुप्लीकेट नामों और अन्य संदिग्ध श्रेणियों की पहचान के बाद कार्रवाई में इतना समय क्यों लग रहा है? और जब विभाग के पास डिजिटल स्तर पर संदिग्ध लाभुकों की सूची उपलब्ध है, तो जमीनी सत्यापन की प्रक्रिया को तेज क्यों नहीं किया जा रहा ? विभागीय रिपोर्ट के अनुसार जांचे गए मामलों में 11 लाभुक पात्र पाए गए, जबकि 2,873 मामलों में नाम हटाने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है. यह आंकड़ा बताता है कि जांच प्रक्रिया में अपात्रता के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है. सरकार की राशन व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है. ऐसे में अपात्र लोगों के नाम राशन सूची में बने रहना न केवल सरकारी संसाधनों पर बोझ है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकार पर भी सवाल खड़ा करता है.
अब निगाह इस बात पर है कि विभाग लंबित 21,235 मामलों का सत्यापन कितनी तेजी से पूरा करता है. यदि जांच निष्पक्ष और जमीनी स्तर पर होती है, तो यह अभियान राशन व्यवस्था में वर्षों से चली आ रही गड़बड़ियों पर प्रभावी प्रहार साबित हो सकता है. लेकिन यदि कार्रवाई केवल आंकड़ों और कागजी सत्यापन तक सीमित रही, तो अपात्र लाभुकों के नाम हटाने का यह अभियान भी सरकारी फाइलों में एक और उपलब्धि बनकर रह जाएगा.
रिपोर्ट: मनीष बरणवाल


































































