चांडिल: सरायकेला- खरसावां जिले के कुकड़ू क्षेत्र में टाटा पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के सफल नहीं हो पाने के बाद कंपनी से जुड़ी करीब 436.93 एकड़ रैयती जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहित कर औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्रवाई शुरू हो गई है. टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की ओर से सरकार को जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव दिए जाने के बाद झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (जियाडा) ने जमीन का भौतिक सत्यापन और मापी शुरू करा दी है.


जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन ने बताया कि प्रस्तावित जमीन से संबंधित जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर नवंबर तक सरकार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी. इसके बाद सरकारी स्तर पर निर्णय होने पर जमीन को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.
प्रोजेक्ट नहीं चढ़ा परवान, अब औद्योगिक क्षेत्र बनाने की तैयारी
कुकड़ू क्षेत्र में टाटा पावर के प्रोजेक्ट के लिए जमीन की व्यवस्था की गई थी, लेकिन प्रस्तावित परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद कंपनी ने जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव दिया. इसी प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई करते हुए जियाडा ने जमीन की मौजूदा स्थिति और औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं का आकलन शुरू किया है.
जियाडा के कार्यालय आदेश में भी टाटा पावर कंपनी लिमिटेड, जोजोबेरा प्लांट, जमशेदपुर की ओर से प्रबंध निदेशक, जियाडा को पत्र के माध्यम से कुकड़ू में लगभग 436.93 एकड़ रैयती भूमि को औद्योगिक विकास अथवा औद्योगिक पार्क की स्थापना के उपयोग में लाने संबंधी प्रस्ताव दिए जाने का उल्लेख है.
जमीन की मापी के साथ स्वामित्व और वैधानिक स्थिति की भी जांच
प्रस्ताव मिलने के बाद जियाडा ने संयुक्त समिति का गठन किया है. समिति को जमीन की भौतिक स्थिति, स्वामित्व, वैधानिक स्थिति, संपर्कता, आधारभूत संरचनाओं की उपलब्धता और औद्योगिक विकास की दृष्टि से इसकी व्यवहार्यता की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है. अब इसी आदेश के आलोक में जमीन का भौतिक सत्यापन और मापी शुरू हो गई है. जांच में यह देखा जाएगा कि उपलब्ध जमीन का कितना हिस्सा औद्योगिक उपयोग के लिए व्यवहारिक है और वहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए किन आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता होगी.
15 दिनों में फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश
जियाडा द्वारा गठित समिति को जांच के बाद 15 दिनों के भीतर इंडस्ट्रियल फिजिबिलिटी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. समिति में जियाडा के आदित्यपुर और रांची कार्यालय के अधिकारियों के साथ तकनीकी प्रतिनिधि तथा टाटा पावर के अधिकृत प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया है. जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन के अनुसार पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट नवंबर तक सरकार को सौंपने की तैयारी है. सरकार के स्तर से आगे का निर्णय होने के बाद ही जमीन के अधिग्रहण और औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी.
कुकड़ू के लिए खुल सकती है औद्योगिकीकरण की नई राह
टाटा पावर का मूल प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर सका, लेकिन अब उसी जमीन को बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की संभावना तलाशी जा रही है. करीब 437 एकड़ जमीन यदि औद्योगिक विकास के लिए उपयुक्त पाई जाती है और सरकार प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है तो भविष्य में यहां अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है. इसके साथ ही अन्य रैयतों को भी अपनी जमीन औद्योगिक सेक्टर में देने का रास्ता खुल जाएगा. फिलहाल पूरी प्रक्रिया प्रारंभिक जांच और फिजिबिलिटी के स्तर पर है. इसलिए जमीन के सरकारी अधिग्रहण और औद्योगिक क्षेत्र के विकास को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं, बल्कि चल रही प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए.

