सरायकेला: सरायकेला नगर पंचायत क्षेत्र को रोशन करने के नाम पर सरकारी खजाने से करीब एक करोड़ 40 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्से आज भी अंधेरे में हैं. वर्ष 2024 में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के कार्यकाल के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र में लगाई गई स्ट्रीट लाइटें नियमित रूप से नहीं जल रही हैं. वहीं, स्ट्रीट लाइट लगाने के बाद संवेदक द्वारा अब तक नगर पंचायत को विधिवत हैंडओवर किए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की बात सामने आ रही है. इसके बावजूद योजना की पूरी राशि के भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.


जानकारी के अनुसार, स्ट्रीट लाइट लगाने का टेंडर जुडको के माध्यम से लिया गया था. योजना के तहत नगर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं. स्थानीय लोगों के अनुसार, लाइटें लगने के कुछ दिनों बाद ही कई स्थानों पर इनके जलने की समस्या शुरू हो गई. वर्तमान में शाम ढलते ही शहर के कई हिस्सों में अंधेरा छा जाता है.
दशहरा से पहले भी शहर की कई सड़कें अंधेरे में. सुरक्षा को लेकर चिंता
दशहरा का पर्व नजदीक है और शहर में बाजारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है. ऐसे में सड़कों और गलियों में स्ट्रीट लाइटों का नियमित रूप से नहीं जलना लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. अंधेरी सड़कों के कारण राहगीरों, महिलाओं और बच्चों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, सुनसान इलाकों में आपराधिक घटनाओं की आशंका को लेकर भी लोग चिंतित हैं.
लाइटें बंद, भुगतान और गुणवत्ता पर सवाल
इस मामले में स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता, भुगतान और हैंडओवर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. नगरवासियों का आरोप है कि करीब एक करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें कुछ ही दिनों में खराब हो गईं. लोगों ने योजना में कथित अनियमितता की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. ऐसे में योजना से संबंधित दस्तावेजों, भुगतान की प्रक्रिया, कार्य की गुणवत्ता और हैंडओवर की स्थिति की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह चालू नहीं थीं और संवेदक ने नगर पंचायत को विधिवत हैंडओवर नहीं किया था, तो भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई.
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने भी उठाई जांच की मांग
स्ट्रीट लाइटों के बंद रहने और योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर नगर पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की ओर से भी जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है. इसके बावजूद अब तक मामले में जांच का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है. इससे नगरवासियों में नाराजगी है और वे योजना की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग कर रहे हैं.
नगरवासियों ने मांगा सरकारी राशि का हिसाब
नगरवासियों का कहना है कि शहर को रोशन करने के उद्देश्य से सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन यदि इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है तो योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. लोगों ने मांग की है कि स्ट्रीट लाइट योजना से जुड़े सभी अभिलेखों, भुगतान, कार्य की गुणवत्ता और हैंडओवर प्रक्रिया की जांच कराई जाए.
नगरवासियों ने यह भी मांग की है कि दशहरा से पहले शहर की सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराकर नियमित रूप से चालू कराया जाए, ताकि त्योहार के दौरान लोगों को आवागमन में परेशानी न हो और शहर की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर रहे.
एक करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से लगाई गई स्ट्रीट लाइटों का अपेक्षित लाभ आम लोगों को नहीं मिलना अब नगर पंचायत की कार्यप्रणाली, योजना की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं.
प्रमोद सिंह (संपादक)

