चांडिल: सावन माह की पावन संध्या पर चांडिल के ऐतिहासिक जयदा मंदिर परिसर में रविवार को काशी की तर्ज पर भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया. आध्यात्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और सांस्कृतिक भव्यता से सजे इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव और मां गंगा की आराधना की. संध्या ढलते ही पूरा मंदिर परिसर दीपों की जगमगाहट, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा. चारों ओर “हर-हर महादेव” और “हर-हर गंगे” के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया.



पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित आचार्यों और पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भव्य गंगा आरती संपन्न कराई. आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हाथों में दीप जलाकर मां गंगा और भगवान भोलेनाथ का स्मरण किया तथा क्षेत्र की सुख- समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की. आरती की अलौकिक छटा और आध्यात्मिक वातावरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव- विभोर कर दिया.

आयोजन में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली. श्रद्धालुओं ने कहा कि जयदा मंदिर में आयोजित यह भव्य गंगा आरती उन्हें वाराणसी के दशाश्वमेध घाट की याद दिला गई. उन्होंने ऐसे धार्मिक आयोजनों को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया.
आयोजकों ने बताया कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और समाज में सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना का संदेश देना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है.

आयोजन को लेकर पुलिस- प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. यातायात व्यवस्था, पार्किंग और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंध किए गए, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ.
रिपोर्ट: विकास ठाकुर





