आदित्यपुर: एस टाइप चौक पर कथित रूप से दुकानों को तोड़े जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और सरायकेला विधायक चंपाई सोरेन ने अपने रुख को लेकर उठ रहे भ्रम को दूर करने की कोशिश की है. उनके मीडिया प्रभारी सुधीर कुमार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने केवल एस टाइप चौक पर हुई कार्रवाई का विरोध किया है, न कि वार्ड संख्या-17 स्थित प्रभात पार्क के आसपास हुए अतिक्रमण का समर्थन किया है.


मंगलवार को आदित्यपुर स्थित आयडा सभागार में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की मौजूदगी में जिला प्रशासन, नगर निगम, आवास बोर्ड के अधिकारियों और प्रभावित दुकानदारों की बैठक हुई. बैठक में पीड़ित दुकानदारों ने आरोप लगाया कि एक स्थानीय दबंग द्वारा निजी स्तर पर जेसीबी चलाकर उनकी दुकानें तोड़ दी गईं. दुकानदारों का दावा है कि कुछ दुकानें आवास बोर्ड द्वारा आवंटित भी थीं.
बैठक के दौरान आवास बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि आवास बोर्ड की है, लेकिन दुकानें तोड़ने की कार्रवाई उनकी ओर से नहीं कराई गई थी. वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा कि बिना सक्षम अनुमति के किसी व्यक्ति को आवास बोर्ड की भूमि पर बुलडोजर चलाने का अधिकार नहीं है.
सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद चंपाई सोरेन ने प्रशासन को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया तथा प्रभावित दुकानदारों को पुनः दुकान खोलने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि गरीब दुकानदारों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
हालांकि इस पूरे विवाद के बीच प्रभात पार्क के समीप अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई. इस संबंध में चंपाई सोरेन के मीडिया प्रभारी सुधीर कुमार ने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को एस टाइप चौक मामले से जोड़कर पेश कर रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रभात पार्क अतिक्रमण मामले पर कोई सार्वजनिक स्टैंड नहीं लिया है.
इधर स्थानीय पार्षद नीतू शर्मा ने बताया कि उन्होंने भी पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्रभात पार्क के आसपास हुए अतिक्रमण और उससे उत्पन्न समस्याओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के कारण स्थानीय लोगों को जाम, गंदगी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
नीतू शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान रूप से नहीं की गई. कुछ दुकानदारों को हटाया गया, जबकि अन्य का कब्जा अब भी बरकरार है. उन्होंने मांग की कि यदि अतिक्रमण हटाना है तो सभी अवैध कब्जों के खिलाफ समान कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा किसी के साथ पक्षपातपूर्ण या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
पार्षद ने प्रभात पार्क की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्क परिसर और उसके आसपास फैली गंदगी, शोर- शराबा और अव्यवस्था से स्थानीय लोग परेशान हैं. उन्होंने पार्क के संचालन और रखरखाव व्यवस्था की समीक्षा तथा प्रभात पार्क के टेंडर के पुनर्मूल्यांकन की भी मांग की.
फिलहाल एस टाइप चौक और प्रभात पार्क से जुड़े दोनों मुद्दों ने आदित्यपुर में अतिक्रमण, आजीविका, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है. लोगों की नजर अब इस बात पर है कि प्रशासन जांच और कार्रवाई को किस दिशा में आगे बढ़ाता है.



