सरायकेला/आदित्यपुर: 395 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति योजना अब लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनती जा रही है. वर्ष 2018 में शुरू हुई यह योजना दिसंबर 2021 तक पूरी हो जानी थी, लेकिन पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज भी हजारों लोग नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर रविवार को जन कल्याण मोर्चा और आदित्यपुर अधिवक्ता संघ की संयुक्त बैठक में प्रशासन, नगर निगम और कार्य एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए.


बैठक की अध्यक्षता जन कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता ओमप्रकाश ने की, जबकि संचालन आदित्यपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दीपेंद्र नाथ ओझा ने किया. बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना धरातल पर पूरी तरह सफल नहीं हो सकी है. इससे आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है.
बैठक में सबसे बड़ा सवाल सीतारामपुर स्थित 30 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर उठाया गया. मोर्चा के अध्यक्ष ओमप्रकाश ने कहा कि यह प्लांट करीब दो महीने पहले तैयार हो चुका है और 9 अप्रैल से जल परीक्षण का कार्य भी शुरू हो गया था. इसके बावजूद आज तक आम लोगों को इस प्लांट से जलापूर्ति शुरू नहीं की गई है. उन्होंने इसे नगर निगम आदित्यपुर की घोर लापरवाही, निष्क्रियता और जवाबदेही के अभाव का उदाहरण बताया.
उन्होंने कहा कि जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं पेयजल योजनाओं में लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दे चुके हैं, तब भी नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की सुस्ती समझ से परे है. सवाल यह है कि जब प्लांट तैयार है और परीक्षण भी पूरा हो चुका है, तो आखिर जलापूर्ति शुरू करने में देरी क्यों हो रही है.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 12 जून 2026 तक 30 एमएलडी सीतारामपुर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, नए पाइपलाइन से सभी वैध उपभोक्ताओं को कनेक्शन नहीं दिया गया और सपड़ा स्थित 60 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को अगस्त 2026 तक चालू करने का लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो 13 जून 2026 को पटेल चौक और आकाशवाणी चौक के समीप एक दिवसीय महाधरना आयोजित किया जाएगा.
बैठक में यह भी कहा गया कि योजना की धीमी प्रगति पर न तो विधानसभा में प्रभावी ढंग से सवाल उठाए गए और न ही लोकसभा में इस मुद्दे को अपेक्षित गंभीरता से रखा गया. इसके कारण समस्या वर्षों तक लंबित बनी रही और जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा.
संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन, नगर निगम और कार्य एजेंसी ने समय रहते जवाबदेही नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद यदि नागरिकों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह विकास मॉडल पर बड़ा सवाल है.
बैठक में जन कल्याण मोर्चा एवं अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग उपस्थित रहे. अंत में उपाध्यक्ष सुनील कुमार स्वाईं ने धन्यवाद ज्ञापन किया.



