रामगढ़: जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल हुई है. बैंक खातों के माध्यम से संदिग्ध लेन- देन करने वाले चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया गया है.

मामले की शुरुआत गृह मंत्रालय भारत सरकार के I4C पोर्टल पर प्राप्त सूचना से हुई, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक के एक खाते में संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली थी. पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर अपराध थाना रामगढ़ में कांड दर्ज कर 28 अप्रैल 2026 से जांच शुरू की गई.
जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित बैंक खाता फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोला गया था और इसे देशभर में साइबर ठगी के लिए उपयोग किया जा रहा था. NCRP पोर्टल पर इस खाते से जुड़े कुल 274 शिकायतें दर्ज पाई गईं, जो विभिन्न राज्यों से संबंधित हैं.
पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान, बैंक डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों- राहुल गुप्ता (37 वर्ष), रवि कुमार वर्मा (34 वर्ष), रितेश अग्रवाल उर्फ मुन्ना (40 वर्ष) और सोनू झा (34 वर्ष) को गिरफ्तार किया. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अन्य साइबर अपराधियों के कहने पर बैंक खाते खुलवाते थे, मोबाइल बैंकिंग सक्रिय करते थे और बदले में मोटी रकम प्राप्त करते थे.
बरामदगी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 06 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 11 मोबाइल सिम कार्ड, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेक बुक एवं अन्य वित्तीय दस्तावेज बरामद किए हैं. ये सभी सामान साइबर ठगी में उपयोग किए जा रहे थे.

छापामारी टीम में शामिल अधिकारी
इस कार्रवाई में साइबर थाना रामगढ़ की टीम की अहम भूमिका रही. छापेमारी दल में पुनि. विनय पांडेय (साइबर अपराध थाना), पुअनि. रंजीत कुमार यादव, एएसआई जितेंद्र पासवान सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाकर आरोपियों को दबोचा.

जारी रहेगा अभियान: एसपी
पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत ने बताया कि जिले में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आम जनता को जागरूक करने के साथ- साथ अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे. इस संबंध में साइबर थाना कांड संख्या 08/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111(2)(b), 111(3), 316(2), 317(4), 319(2), 318(4) एवं आईटी एक्ट 2000 की धारा 66(c) एवं 66(d) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है. गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है.

