आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर एक नया विवाद सामने आ रहा है. आरोप है कि कई वार्डों में योजनाएं पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई हैं, इसके बावजूद संवेदकों पर बिल पास कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि नगर निगम में लंबे समय तक चुने हुए जनप्रतिनिधियों की गैर मौजूदगी में अधिकांश विकास कार्य केवल विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर के आधार पर चल रहे थे. अब नगर निकाय चुनाव संपन्न हो चुका है और मेयर, अध्यक्ष व पार्षदों का चयन भी हो गया है.
जानकारी के अनुसार डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का चुनाव 16 और 17 मार्च को होना है. इसके बाद शहरी निकायों की नई सरकार औपचारिक रूप से अस्तित्व में आ जाएगी. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नई निर्वाचित टीम यदि पहले हुए विकास कार्यों की जांच की मांग कर दे तो कई योजनाओं पर सवाल खड़े हो सकते हैं.
सूत्रों की मानें तो इसी आशंका के चलते कुछ संवेदकों पर अधूरे कार्यों के बावजूद बिल पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया जा रहा है. यदि बाद में जांच होती है तो न केवल संवेदकों का भुगतान अटक सकता है बल्कि विभागीय स्तर पर कमीशन के आरोप भी सामने आ सकते हैं.
स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई निकाय सरकार गठन के बाद इन योजनाओं की समीक्षा होती है या नहीं.

