आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र में बीजेपी के बड़े नेताओं की लगातार दौड़ जारी है. पार्टी समर्थित प्रत्याशी संजय सरदार को जिताने के लिए अलग- अलग वर्गों को साधने की रणनीति बनाई जा रही है, लेकिन जमीनी हालात उतने सहज नहीं दिख रहे.

सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भाजपा टिकट से चुने गए मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यकाल को लेकर मतदाताओं में असंतोष है. इसी वजह से पार्टी के शीर्ष नेताओं को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है. सीट आरक्षित होने के कारण गैर- आदिवासी मतदाताओं की सीमित दिलचस्पी भी चर्चा में है. वहीं केंद्र सरकार के कथित UGC बिल को लेकर सवर्ण मतदाताओं में दुविधा की बात सामने आ रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह असंतोष कायम रहा तो मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ सकता है.
मंगलवार को एक घटनाक्रम ने इन अटकलों को और बल दिया. सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के दो वरिष्ठ नेता स्वर्ण समाज के एक प्रमुख नेता से मुलाकात करने पहुंचे और पार्टी समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने का आग्रह किया. हालांकि, बातचीत के दौरान UGC बिल को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन बताया जा रहा है कि वार्ता बेनतीजा रही.
उधर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की कथित नाराजगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय विधायक होने के बावजूद वे अभी तक भाजपा समर्थित प्रत्याशी के प्रचार में सक्रिय नजर नहीं आए हैं. कुल मिलाकर, आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार के लिए राह आसान नहीं दिख रही. असंतुष्टों, बागियों और संभावित कम मतदान प्रतिशत जैसे कारक चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं. आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और जनसंपर्क अभियान इस मुकाबले की दिशा तय करेंगे.

