रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 निर्माण परियोजना के खिलाफ बड़े जन आंदोलन की घोषणा की है. शनिवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि अगले दस दिनों के भीतर लाखों आदिवासी- मूलवासी और किसान नगड़ी पहुंचकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे.


चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनने का आरोप लगाते हुए कहा कि रांची में कई स्थानों पर पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, इसके बावजूद किसानों को विस्थापित कर रिम्स-2 का निर्माण कराया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार एचईसी की सैकड़ों एकड़ जमीन ले चुकी है और और अधिक भूमि लेने की प्रक्रिया में है, तो अस्पताल निर्माण के लिए उसी भूमि का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलन को जन- जन तक पहुंचाने के लिए गांव- गांव में डुगडुगी बजाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा. उन्होंने बताया कि आंदोलन के लिए प्रत्येक समर्थक से एक मुट्ठी चावल और 10 रुपये का सहयोग लिया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगड़ी के किसानों को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा.
चम्पाई सोरेन ने कहा कि रांची शहर आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन पर बसा है. उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में एचईसी, लॉ यूनिवर्सिटी और अन्य परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया, लेकिन प्रभावित रैयतों को आज तक उचित पुनर्वास नहीं मिला. उन्होंने कहा कि जब एचईसी ने अतिरिक्त जमीन सरकार को लौटाई, तब भी उसे मूल रैयतों को वापस करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया.
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1957- 58 में जिस भूमि अधिग्रहण का हवाला सरकार दे रही है, वह प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हुई थी. विरोध के बाद तत्कालीन सरकार ने इसे रोक दिया था और स्थानीय किसान वर्ष 2012 तक उस भूमि की मालगुजारी भी जमा करते रहे. ऐसे में अधिग्रहण को पूर्ण मानना उचित नहीं है.
नगड़ी भूमि विवाद को लेकर चम्पाई सोरेन के इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि किसानों, आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस चेतावनी और प्रस्तावित आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है.



