सरायकेला/ Pramod Singh वर्षों का लंबा अंतराल भी बचपन की दोस्ती की गर्माहट को कम नहीं कर सका. सरायकेला उड़िया नगरपालिका के वर्ष 1984 बैच के पूर्व छात्रों ने रविवार को खरकई नदी किनारे स्थित पिकनिक स्पॉट पर वनभोज का आयोजन किया. इस मिलन समारोह में चार दशक पुरानी यादें एक बार फिर जीवंत हो उठीं और हंसी- ठिठोली के बीच सभी मित्र अपने स्कूली दिनों में खो गए.

कार्यक्रम की शुरुआत एक-दूसरे को गले लगाकर और पुराने उपनामों से पुकारने के साथ हुई. वनभोज के दौरान सहपाठियों ने स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया और अपनी पुरानी शरारतों, शिक्षकों के अनुशासन और साथ बिताए गए अविस्मरणीय पलों को याद किया. वर्ष 1984 बैच के कई साथी आज देश- विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं, लेकिन इस मिलन में सभी अपनी उपलब्धियां भूलकर फिर से वही छात्र बन गए थे.
कई साथियों ने पुरानी तस्वीरें साझा कीं, जिन्हें देखकर माहौल भावुक हो गया. किसी ने कक्षा की बेंच पर नाम उकेरने की घटना सुनाई, तो किसी ने लंच साझा करने के दिनों को याद किया. इस दौरान दिवंगत साथियों और शिक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया गया.
उड़ीसा के भुवनेश्वर में व्यवसाय कर रहे देवाशीष आचार्य ने कहा कि यह केवल पिकनिक नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने जैसा अनुभव था. वहीं लेफ्टिनेंट सुदीप आचार्य ने कहा कि इतने वर्षों बाद मित्रों से मिलकर ऐसा लगा जैसे समय ठहर गया हो.
कार्यक्रम के अंत में सभी ने अगले वर्ष पुनः मिलने और इस परंपरा को जारी रखने का संकल्प लिया. सामूहिक फोटो और दोस्ती के नारों के साथ यादगार दिन का समापन हुआ. वनभोज में देवाशीष आचार्य, पितोवासो परीक्षा, रवि शंकर दास, सुशांतो पट्टनायक, राजेश दारोगा, श्रीधर चौधरी, सनत कुमार साहू, दिनेश षाड़ंगी, रविंद्र नाथ मोदक, अरुण बेहरा, भवेश कवि, रंजीत पति, शशांको पट्टनायक समेत अन्य साथी उपस्थित थे.

