जामताड़ा/ Manish Baranwal बसंत पंचमी के अवसर पर जहां एक ओर जिलेभर में सरस्वती पूजा की धूम रही, वहीं बंगाली समुदाय के विशेष पर्व सिझानों को लेकर भी उत्सवी माहौल देखने को मिला. शिक्षण संस्थानों और गली- मोहल्लों में बच्चों और छात्रों के बीच मां सरस्वती की पूजा को लेकर उत्साह रहा, तो दूसरी ओर सिझानों पर्व को लेकर बाजारों में खासा चहल- पहल नजर आई.

बंगाली समुदाय के बीच सिझानों पर्व का विशेष महत्व है. परंपरा के अनुसार महिलाएं इस दिन स्नान कर विशेष व्यंजन तैयार करती हैं और अगले दिन पूरे परिवार एवं परिजनों के साथ मिलकर उसी भोजन का सेवन किया जाता है. इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और बासी भोजन ग्रहण करने की परंपरा निभाई जाती है.
सिझानों पर बंधु- बांधवों को भोजन के लिए आमंत्रित करने की भी परंपरा है. पर्व में मछली का विशेष स्थान होता है. शुक्रवार को बाजारों में विभिन्न किस्म की मछलियों की भरमार देखी गई. मांग अधिक होने के कारण मछली बाजार में दाम भी ऊंचे रहे. लोग अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी में जुटे नजर आए.
संथाल परगना क्षेत्र में बांग्ला भाषियों की अधिकता के कारण इस पर्व की गहमागहमी और भी ज्यादा दिखाई दी. समाजसेवी देवव्रत सरकार ने बताया कि सिझानों पर मुख्य रूप से मां शष्ठी की पूजा की जाती है. उन्हें अर्पित किए जाने वाले विशेष प्रसाद को कहीं कलाई सिद्धो तो कहीं मां शष्ठी भोग के नाम से जाना जाता है. इस प्रसाद में विभिन्न प्रकार के साबुत दलहनों को एक साथ सिझाकर तैयार किया जाता है, जिसे मुख्य प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. बसंत पंचमी और सिझानों पर्व के संगम ने जिले में सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सौहार्द की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत की.

